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कंगना के बयान से मचा बवाल, विशाल ददलानी बोले—छात्रों की आवाज दबाओगे तो विरोध और तेज होगा l

भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनोट के हालिया विवादित बयानों ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। उन्होंने जहां एक ओर छात्र प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार को “घिनौना” बताया, वहीं नई पीढ़ी की महिलाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें “गटर जेनरेशन” तक कह दिया। इन बयानों के खिलाफ अब सिंगर और म्यूजिक कंपोजर विशाल ददलानी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने न सिर्फ कंगना की टिप्पणियों की आलोचना की, बल्कि छात्रों के समर्थन में खड़े होते हुए यह भी कहा कि जब युवाओं के साथ सड़कों पर हिंसा होगी, तो उनकी प्रतिक्रिया को सिर्फ “गलत भाषा” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Kashish Rai30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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कंगना के बयान से मचा बवाल, विशाल ददलानी बोले—छात्रों की आवाज दबाओगे तो विरोध और तेज होगा l

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं और सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें बल प्रयोग के आरोप लगाए गए।

इन घटनाओं के बाद कंगना रनोट ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदर्शनकारियों की भाषा और उनके व्यवहार को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतनी “बदसूरती” पहले कभी नहीं देखी और Gen Z की भाषा शैली को बेहद आपत्तिजनक बताया। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर इस नई पीढ़ी की परवरिश कैसे हो रही है।


इसके अलावा, कंगना ने भारतीय युवा महिलाओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता के नाम पर गलत जीवनशैली अपना रही हैं। उनके मुताबिक, आज की कई युवा महिलाएं नशा, शराब और अनियंत्रित संबंधों को स्वतंत्रता समझती हैं, जबकि असली आजादी जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता के साथ आती है। उन्होंने इस सोच को “गटर जेनरेशन” कहकर संबोधित किया, जिससे विवाद और गहरा गया। कंगना के इन बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विशाल ददलानी ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट शेयर किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की भाषा पर सवाल उठाने से पहले यह देखना जरूरी है कि उनके साथ क्या व्यवहार हुआ। 


विशाल के अनुसार, छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और यहां तक कि उन्हें डराने-धमकाने के लिए बाहरी लोगों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने अपने बयान में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर युवाओं को सड़कों पर इस तरह से पीटा जाएगा, तो वे गुस्से में प्रतिक्रिया देंगे ही, और इसके लिए उन्हें दोषी ठहराना सही नहीं है। विशाल ने यह भी कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में इस्तेमाल की गई भाषा को संदर्भ से अलग करके देखना गलत है। इसके साथ ही, विशाल ददलानी ने एक और गंभीर आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए पेड कैंपेन चलाए जा रहे हैं।


 उन्होंने कहा कि कुछ इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए जानबूझकर ऐसी कहानी बनाई जा रही है, जिससे प्रदर्शनकारियों को गलत साबित किया जा सके। उनके अनुसार, इस तरह के प्रयास लोकतांत्रिक विरोध की भावना को कमजोर करते हैं। यह विवाद अब केवल दो व्यक्तियों के बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध के अधिकार और युवाओं के प्रति सामाजिक नजरिए जैसे बड़े मुद्दों को भी सामने ला रहा है। एक तरफ जहां कंगना रनोट प्रदर्शन के तरीकों और भाषा पर सवाल उठा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विशाल ददलानी जैसे लोग प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार और उनके गुस्से के कारणों को समझने की बात कर रहे हैं।


सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोग कंगना के विचारों का समर्थन कर रहे हैं और मानते हैं कि विरोध का तरीका सभ्य होना चाहिए, जबकि कई अन्य लोग छात्रों के समर्थन में खड़े हैं और पुलिस कार्रवाई तथा सरकारी रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला अब एक व्यापक बहस का रूप ले चुका है, जिसमें सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि समाज, राजनीति और युवाओं की भूमिका जैसे कई पहलुओं पर चर्चा हो रही है।