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सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने बदली 16 प्रदर्शनकारियों की किस्मत! 3 घंटे में जेल से जमानत तक पहुंचा कोलकाता हिंसा मामला

कोलकाता में NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार 16 प्रदर्शनकारियों को पहले न्यायिक हिरासत भेज दिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश का हवाला दिए जाने के बाद बैंकशाल कोर्ट ने महज तीन घंटे के भीतर अपना फैसला बदल दिया। इस असाधारण घटनाक्रम ने न्यायिक प्रक्रिया और छात्र आंदोलनों पर एक नई कानूनी बहस छेड़ दी।

Sonali30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने बदली 16 प्रदर्शनकारियों की किस्मत! 3 घंटे में जेल से जमानत तक पहुंचा कोलकाता हिंसा मामला

कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 24 जुलाई 2026 को कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में निकले प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार 16 प्रदर्शनकारियों को नाटकीय घटनाक्रम के बीच जमानत मिल गई। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बैंकशाल कोर्ट ने पहले सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा और कुछ ही घंटों बाद उसी दिन अपने आदेश पर पुनर्विचार करते हुए उन्हें जमानत दे दी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम निर्देशों का हवाला दिए जाने के बाद आया। 


क्या है पूरा मामला?

24 जुलाई 2026 को वामपंथी छात्र संगठनों और अन्य संगठनों ने कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में सियालदह से धर्मतल्ला (एस्प्लेनेड) तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई पत्रकार भी हिंसा की चपेट में आए। इसके बाद कोलकाता पुलिस ने विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर 16 लोगों को गिरफ्तार किया। 


28 जुलाई को क्या हुआ?

28 जुलाई 2026 को सभी 16 आरोपियों को कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट स्थित मुख्य महानगर दंडाधिकारी (Chief Metropolitan Magistrate - CMM) की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को 30 जुलाई 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। हालांकि, इसके तुरंत बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए तत्काल पुनः सुनवाई की मांग की। अदालत ने दोबारा सुनवाई स्वीकार की और कुछ ही घंटों में अपना पहला आदेश बदलते हुए सभी 16 आरोपियों को ₹500 के निजी मुचलके (Personal Bond) पर जमानत दे दी। अदालत ने आरोपियों को जांच में सहयोग करने तथा आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का भी निर्देश दिया। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में आदेश पारित करने वाले CMM का नाम प्रकाशित नहीं किया गया है। 


सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कानूनी आधार

बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम आदेश का हवाला दिया, जिसमें राज्यों को छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अनावश्यक दंडात्मक या जबरन कार्रवाई (Coercive Action) से बचने का निर्देश दिया गया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है या जिन पर गंभीर हिंसा के आरोप हैं, उनके मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रह सकती है। इसी आदेश के आधार पर बैंकशाल कोर्ट ने उसी दिन अपने पहले के न्यायिक हिरासत आदेश पर पुनर्विचार किया और आरोपियों को जमानत दे दी। 


वकीलों की संयुक्त टीम की दलील

बचाव पक्ष की संयुक्त कानूनी टीम ने अदालत में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद आरोपियों को हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए तत्काल पुनः सुनवाई की। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यह समन्वित कानूनी प्रयास विभिन्न अधिवक्ताओं और नागरिक अधिकार समूहों के सहयोग से किया गया, जिसके बाद सभी आरोपियों को राहत मिली। 


अन्य मीडिया रिपोर्टों में क्या सामने आया?

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अदालत ने सभी आरोपियों को ₹500 के निजी मुचलके पर जमानत दी। रिपोर्ट में बताया गया कि पहले न्यायिक हिरासत का आदेश पारित हुआ, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिए जाने के बाद अदालत ने उसी दिन अपना आदेश बदल दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जमानत मिलने के बाद बैंकशाल कोर्ट परिसर के बाहर आरोपियों के परिजनों और समर्थकों ने फूल बरसाकर, गले लगाकर और भावुक होकर उनका स्वागत किया। कुछ आरोपियों ने कहा कि वे अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।


कलकत्ता हाईकोर्ट की भी नजर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने 24 जुलाई की हिंसा के दौरान घायल हुए एक पत्रकार की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार से जांच की प्रगति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि हिंसा और पत्रकारों पर हमले की जांच किस चरण में है। इससे स्पष्ट है कि जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।


क्या जमानत का मतलब क्लीन चिट है?

नहीं। अदालत ने केवल आरोपियों को जमानत दी है। जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। एफआईआर, पुलिस जांच और आगे की न्यायिक कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो मुकदमे की सुनवाई भी आगे बढ़ेगी।