environment
पर्यावरण से समझौता नहीं! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बिना मंजूरी शुरू नहीं होंगी विकास परियोजनाएं
देशभर की सड़क, रेलवे, खनन और औद्योगिक परियोजनाओं पर असर डालने वाले ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पर्यावरणीय मंजूरी के बिना कोई भी विकास परियोजना शुरू नहीं की जा सकती। अदालत ने केंद्र सरकार के 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा।

नई दिल्ली।
देशभर में सड़क, रेलवे, खनन, उद्योग और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी (Prior Environmental Clearance) लेना अनिवार्य होगा। अदालत ने केंद्र सरकार के 7 जुलाई 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम (Office Memorandum) को रद्द करते हुए कहा कि केवल प्रशासनिक आदेश के जरिए बिना पूर्व मंजूरी शुरू हुई परियोजनाओं को बाद में नियमित (Regularise) नहीं किया जा सकता। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006 की भावना को मजबूत करता है और भविष्य की सभी विकास परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला पर्यावरण संगठन Vanashakti एवं अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर जनहित याचिकाओं से जुड़ा था। इन याचिकाओं में केंद्र सरकार के 7 जुलाई 2021 के Office Memorandum को चुनौती दी गई थी। इस मेमोरेंडम में उन परियोजनाओं के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तय की गई थी, जिन्होंने बिना पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के निर्माण कार्य शुरू कर दिया था और बाद में मंजूरी प्राप्त करना चाहते थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस प्रकार की व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और EIA Notification, 2006 के विपरीत है तथा इससे पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वालों को संरक्षण मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि—
किसी भी परियोजना के लिए Prior Environmental Clearance अनिवार्य है।
पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन परियोजना शुरू होने से पहले किया जाना चाहिए।
बाद में दी जाने वाली पर्यावरणीय मंजूरी (Ex-post Facto Environmental Clearance) सामान्य नियम नहीं बन सकती।
केवल Office Memorandum के माध्यम से वैधानिक पर्यावरणीय नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
यदि सरकार ऐसी कोई व्यवस्था करना चाहती है तो उसे विधिक प्रक्रिया के तहत वैधानिक अधिसूचना (Statutory Notification) जारी करनी होगी।
अदालत ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा विषय है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय देशभर की राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे, मेट्रो, बंदरगाह, हवाई अड्डा, खनन, ऊर्जा, औद्योगिक और बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। अब किसी भी परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना शुरू करना कानूनी जोखिम पैदा करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर रोक लगेगी।
इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी संसाधन
पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2006
EIA Notification, 2006 के अनुसार सूचीबद्ध परियोजनाओं के लिए निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य है। यही अधिसूचना इस पूरे विवाद की कानूनी नींव है।पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
इस अधिनियम का उद्देश्य पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान का पहले आकलन करना और वैज्ञानिक तरीके से उसकी रोकथाम सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसी कानून की मूल भावना को दोहराया।7 जुलाई 2021 का Office Memorandum
केंद्र सरकार ने बिना पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी शुरू हुई परियोजनाओं के लिए Standard Operating Procedure जारी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा महत्वपूर्ण प्रावधान केवल Office Memorandum के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता और इसे रद्द कर दिया।Vanashakti बनाम Union of India
पर्यावरण संगठन Vanashakti द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि Ex-post Facto Environmental Clearance पर्यावरण कानूनों तथा Precautionary Principle के विरुद्ध है। इसी याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण पुराने फैसले
• Alembic Pharmaceuticals Ltd. v. Rohit Prajapati (2020) – सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि Ex-post Facto Environmental Clearance सामान्य नियम नहीं हो सकती।
• Hanuman Laxman Aroskar v. Union of India (मोपा एयरपोर्ट मामला) – अदालत ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया।
• Common Cause v. Union of India – अवैध खनन और पर्यावरणीय अनुपालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय।
