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जौहर यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका! 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण का खतरा बरकरार, याचिका खारिज

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। कोर्ट ने ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, हालांकि 38 भवनों पर फिलहाल अपीलीय प्राधिकरण की अंतरिम रोक जारी है और अंतिम फैसला अभी बाकी है।

Sonali30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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जौहर यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका! 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण का खतरा बरकरार, याचिका खारिज

प्रयागराज/रामपुर:

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कथित अवैध निर्माणों को लेकर जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित अपीलीय प्राधिकरण पहले से मामले की सुनवाई कर रहा है और अंतरिम आदेश भी पारित कर चुका है, तब इस स्तर पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। 


क्या है पूरा मामला?

रामपुर विकास प्राधिकरण (Rampur Development Authority-RDA) ने 15 जुलाई 2026 को मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत भवन मानचित्र के निर्मित बताते हुए उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किया था। प्राधिकरण का कहना है कि इन भवनों का निर्माण आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना किया गया, इसलिए इन्हें अवैध निर्माण माना गया। अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया था, जिसके बाद नोटिस जारी किया गया।


हाईकोर्ट में क्या हुआ?

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ध्वस्तीकरण नोटिस पर रोक लगाने की मांग की। याचिका में कहा गया कि मोरादाबाद मंडलायुक्त (अपीलीय प्राधिकारी) के समक्ष अपील लंबित है और वहां अंतरिम राहत भी मिल चुकी है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जब सक्षम अपीलीय प्राधिकरण पहले से इस मामले पर विचार कर रहा है, तब हाईकोर्ट में अलग से हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने भी यही माना और याचिका खारिज कर दी। 


मोरादाबाद मंडलायुक्त ने पहले दी थी राहत

इस मामले में 27 जुलाई 2026 को मोरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने विश्वविद्यालय को अंतरिम राहत देते हुए 38 भवनों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर अस्थायी रोक लगा दी थी। यह राहत अंतिम निर्णय आने तक प्रभावी रहेगी। हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में इस तथ्य का उल्लेख किया कि मामला अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है। 


छात्रों और कर्मचारियों ने जताई चिंता

ध्वस्तीकरण नोटिस जारी होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय में हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और यदि भवनों को गिराया जाता है तो शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में भी व्यापक चर्चा को जन्म दिया। 


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद समाजवादी पार्टी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालय को "शिक्षा का मंदिर" बताते हुए कार्रवाई का विरोध किया। वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और भीम आर्मी प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक ध्वस्तीकरण न करने की मांग की।


जौहर यूनिवर्सिटी पहले भी रही है विवादों में

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षों से भूमि अधिग्रहण, सरकारी भूमि के उपयोग, भवन निर्माण, लीज और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े मामलों को लेकर विवादों में रहा है। वर्ष 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय से जुड़ी सरकारी भूमि की लीज समाप्त करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े कई मामलों की सुनवाई विभिन्न अदालतों में जारी रही है।


अब आगे क्या?

अब इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला मोरादाबाद मंडलायुक्त (अपीलीय प्राधिकारी) द्वारा सुनाया जाएगा। यदि अपील खारिज होती है तो रामपुर विकास प्राधिकरण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है। वहीं ट्रस्ट के पास पुनः हाईकोर्ट अथवा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प भी रहेगा। फिलहाल 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक प्रभावी है।