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'काला हिरण' पर बनी फिल्म से बढ़ा विवाद! सलमान खान को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 24 घंटे में टीजर हटाने का आदेश

सलमान खान की छवि और व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 'Kala Hiran: The Battle for Legacy' के टीजर और प्रचार सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि इससे अभिनेता की प्रतिष्ठा को अपूरणीय नुकसान पहुंच सकता है।

Sonali30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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'काला हिरण' पर बनी फिल्म से बढ़ा विवाद! सलमान खान को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 24 घंटे में टीजर हटाने का आदेश

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने फिल्म 'Kala Hiran: The Battle for Legacy' के निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे फिल्म का टीजर और उससे जुड़ी सभी प्रचार सामग्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाएं। अदालत ने कहा कि यदि ऐसी सामग्री का प्रसारण जारी रहता है तो इससे अभिनेता की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने सलमान खान की ओर से दायर व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights) संरक्षण संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। 


क्या है पूरा मामला?

सलमान खान ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि फिल्म के पोस्टर, टीजर और प्रचार अभियान में उनके व्यक्तित्व, सार्वजनिक छवि, पहनावे, स्टाइल, मशहूर ब्रेसलेट और 1998 के काला हिरण शिकार मामले से जुड़े घटनाक्रमों का बिना अनुमति व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग किया गया है। उनका कहना था कि इससे दर्शकों के बीच यह संदेश जाता है कि फिल्म उन्हीं पर आधारित है, जिससे उनकी छवि और प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। 


हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि फिल्म निर्माता अभिनेता की लोकप्रिय पहचान और सार्वजनिक छवि का व्यावसायिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व, नाम, विशिष्ट पहचान और प्रतिष्ठा का उसकी अनुमति के बिना व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। डिजिटल माध्यमों पर इस तरह की सामग्री का प्रसार नुकसान को और अधिक गंभीर बना देता है। 


24 घंटे में हटाने का निर्देश

अदालत ने फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर टीजर और उससे जुड़े सभी पोस्ट, वीडियो तथा प्रचार सामग्री हटाएं। यदि निर्माता ऐसा नहीं करते हैं तो सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म जैसे एक्स (पूर्व ट्विटर), मेटा और गूगल को संबंधित यूआरएल हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

 

निर्माताओं का पक्ष

फिल्म निर्माता अमित जानी ने अदालत में कहा कि यह फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। उनका तर्क था कि किसी सार्वजनिक घटना या न्यायिक कार्यवाही पर आधारित विषय पर फिल्म बनाना व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेता किसी ऐतिहासिक या न्यायिक घटनाक्रम पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते।

 

सलमान खान की दलील

सलमान खान की ओर से अदालत को बताया गया कि विवाद केवल सार्वजनिक घटनाओं का नहीं है, बल्कि उनकी विशिष्ट पहचान, सार्वजनिक छवि और व्यक्तित्व का व्यावसायिक दोहन किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि फिल्म का प्रचार अभियान उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला है और लंबित न्यायिक मामलों से जुड़े तथ्यों को भी विवादित तरीके से प्रस्तुत करता है। 


पहले भी पहुंच चुके हैं कोर्ट

यह पहला अवसर नहीं है जब सलमान खान ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अदालत का रुख किया है। इससे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में अभिनेता के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए उनके नाम, तस्वीर, आवाज और सार्वजनिक पहचान के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने का आदेश दिया था। वर्तमान याचिका उसी मुकदमे का हिस्सा है, जिसमें 'काला हिरण' फिल्म को लेकर अंतरिम राहत मांगी गई थी।


व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं?

भारतीय न्यायालयों ने व्यक्तित्व अधिकारों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन, गरिमा, निजता और प्रतिष्ठा के अधिकार का हिस्सा माना है। इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति के नाम, छवि, आवाज, पहचान या विशिष्ट व्यक्तित्व का उसकी अनुमति के बिना व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सलमान खान के पक्ष में अंतरिम राहत प्रदान की है।