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भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! मुस्लिम पक्ष ने MP सरकार को दिलाई अदालत के आदेश की याद

धार के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान माहौल गरमा गया। मुस्लिम पक्ष ने राज्य सरकार पर अदालत के आदेश का पालन न करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को अपनी प्राथमिकता बताया।

Sonali30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! मुस्लिम पक्ष ने MP सरकार को दिलाई अदालत के आदेश की याद

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के मुद्दे पर हुई सुनवाई के दौरान अदालत में मुस्लिम पक्ष और मध्य प्रदेश सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने राज्य सरकार से कहा कि वह किसी भी प्रकार के दबाव के आगे न झुके और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का अक्षरशः पालन करे। वहीं, राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कानून-व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए सरकार का पक्ष रखा।


क्या है पूरा मामला?

15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर माना और वर्ष 2003 के एएसआई (ASI) के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?

14 जुलाई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (तत्कालीन) न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में राज्य सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि विवादित परिसर के "निकट या उससे सटे" किसी खुले स्थान पर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि यह व्यवस्था अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।


ताजा सुनवाई में क्या हुआ?

ताजा सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत को बताया कि जिला प्रशासन ने जो स्थान उपलब्ध कराया है, वह विवादित परिसर से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर है। उनका कहना था कि यह सुप्रीम कोर्ट के "पास या सटे हुए स्थान" वाले आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने अदालत में टिप्पणी की कि इतने दूर जाकर नमाज अदा करना व्यावहारिक नहीं है और राज्य सरकार को अदालत के निर्देशों का सही तरीके से पालन करना चाहिए।


मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रशासन ने कई संभावित स्थानों का परीक्षण किया, लेकिन कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए वर्तमान स्थान का चयन किया गया। उनका कहना था कि विवादित परिसर के बिल्कुल समीप नमाज की अनुमति देने से शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि उसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना है।


अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार से जवाब मांगा और कहा कि 14 जुलाई के अंतरिम आदेश का पालन "अक्षरशः और भावना के अनुरूप" होना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैकल्पिक स्थल उपलब्ध कराने का उद्देश्य दोनों समुदायों के अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना है।


भोजशाला विवाद का संक्षिप्त इतिहास

धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। हिंदू पक्ष इसे माता सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वर्षों तक एएसआई की व्यवस्था के तहत मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की व्यवस्था लागू थी। मई 2026 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह व्यवस्था बदल गई और मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।