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ग्लोबल विपश्यना पगोडा: दुनिया के सबसे बड़े पत्थर के गुंबदों में से एक; जानिए इतिहास, विपश्यना ध्यान परंपरा और अद्भुत वास्तुकला

मुंबई के गोराई क्षेत्र में स्थित ग्लोबल विपश्यना पगोडा दुनिया के सबसे भव्य ध्यान केंद्रों में से एक है। भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित विपश्यना ध्यान परंपरा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से निर्मित यह स्मारक शांति, करुणा और मानवीय मूल्यों का प्रतीक माना जाता है। सुनहरे रंग का विशाल गुंबद, अद्भुत वास्तुकला और विशाल ध्यान सभागार देश-विदेश से लाखों पर्यटकों और साधकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

Priyanka Gaikwad30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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ग्लोबल विपश्यना पगोडा: दुनिया के सबसे बड़े पत्थर के गुंबदों में से एक; जानिए इतिहास, विपश्यना ध्यान परंपरा और अद्भुत वास्तुकला
ग्लोबल विपश्यना पगोडा मुंबई के पश्चिमी उपनगर गोराई (बोरीवली के निकट) समुद्र तट के पास स्थित एक विश्वस्तरीय ध्यान केंद्र है। यह स्मारक विपश्यना ध्यान परंपरा का वैश्विक प्रतीक माना जाता है। यहां धर्म, जाति या संप्रदाय का कोई भेदभाव नहीं किया जाता और सभी लोगों के लिए ध्यान के द्वार खुले हैं। विपश्यना लगभग 2,500 वर्ष पुरानी ध्यान पद्धति है, जिसे भगवान गौतम बुद्ध ने सिखाया था। इस साधना का उद्देश्य मन को शुद्ध करना, आत्मनिरीक्षण करना और भीतर शांति स्थापित करना है। आधुनिक समय में यह परंपरा म्यांमार से पुनः भारत लौटी। आचार्य एस. एन. गोयनका (सत्यनारायण गोयनका) ने इस ध्यान पद्धति का भारत सहित पूरी दुनिया में व्यापक प्रचार किया। उन्हीं की प्रेरणा से ग्लोबल विपश्यना पगोडा की स्थापना की गई।

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इस पगोडा का निर्माण वर्ष 2000 में शुरू हुआ और लगभग आठ वर्षों के कार्य के बाद 8 फरवरी 2009 को इसका उद्घाटन किया गया। इस परियोजना का निर्माण मुख्य रूप से लोगों द्वारा दी गई स्वैच्छिक दान राशि से किया गया। यहां किसी प्रकार का व्यावसायिक शुल्क नहीं लिया जाता। विपश्यना परंपरा के अनुसार सभी सेवाएं दान के आधार पर संचालित होती हैं। ग्लोबल विपश्यना पगोडा की वास्तुकला म्यांमार के प्रसिद्ध श्वेडागोन पगोडा से प्रेरित है। इसका मुख्य गुंबद दुनिया के सबसे बड़े पत्थर के गुंबदों में से एक माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस विशाल गुंबद के निर्माण में अंदर की ओर किसी भी लोहे के सहारे का उपयोग नहीं किया गया है, जो इसे इंजीनियरिंग और वास्तुकला की दृष्टि से अत्यंत अद्भुत बनाता है।

पगोडा के मध्य में एक विशाल ध्यान सभागार बनाया गया है, जहां एक साथ हजारों साधक ध्यान कर सकते हैं। यहां का वातावरण पूरी तरह शांत, अनुशासित और ध्यान के अनुकूल रखा गया है। नियमित रूप से एक दिवसीय तथा दस दिवसीय विपश्यना ध्यान शिविर भी आयोजित किए जाते हैं। इस पगोडा में भगवान गौतम बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष (Relics) सुरक्षित रूप से स्थापित किए गए हैं। इन्हें म्यांमार से भारत लाया गया था और पगोडा के केंद्रीय भाग में प्रतिष्ठित किया गया है। इसी कारण यह स्थान बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

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पगोडा परिसर में भगवान बुद्ध के जीवन, विपश्यना परंपरा के इतिहास और ध्यान के महत्व को दर्शाने वाली प्रदर्शनी, सूचना दीर्घाएं और ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियां भी उपलब्ध हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को विपश्यना ध्यान की प्रारंभिक जानकारी भी दी जाती है। हरियाली, समुद्र के निकट का शांत वातावरण और आध्यात्मिक माहौल यहां आने वाले लोगों को मानसिक शांति का अनुभव कराता है। ग्लोबल विपश्यना पगोडा तक गोराई जेट्टी से फेरी बोट के माध्यम से या सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। बोरीवली रेलवे स्टेशन से यह स्थान काफी निकट है। पास में स्थित एस्सेल वर्ल्ड और गोराई बीच भी लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं, इसलिए पर्यटक अक्सर इन सभी स्थानों की एक साथ यात्रा करते हैं।

यहां घूमने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे पर्यटक पगोडा परिसर का शांतिपूर्वक भ्रमण करने के साथ-साथ ध्यान का अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप शांति, आत्मचिंतन, बौद्ध विरासत, विश्वस्तरीय वास्तुकला और ध्यान का अनूठा अनुभव एक ही स्थान पर प्राप्त करना चाहते हैं, तो मुंबई का ग्लोबल विपश्यना पगोडा भारत के सबसे प्रेरणादायक आध्यात्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है। हर पर्यटक को अपने जीवन में कम से कम एक बार इस अद्भुत स्थल की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।