education
पेपर लीक पर सख्ती, लोकसभा ने पारित किया संशोधन विधेयक; सदन में राहुल गांधी की टिप्पणी पर हंगामा
लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पारित कर दिया है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और संगठित परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई करना है। सरकार का कहना है कि यह कानून करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाएगा। वहीं, विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी की छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर की गई टिप्पणी पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।
Anshuman Mishra30 जुल. 2026, 07:17 PM IST

लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पारित कर दिया। यह विधेयक ध्वनिमत (Voice Vote) से पारित हुआ। हालांकि विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में तीखी राजनीतिक बहस भी देखने को मिली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और गोली चलाने के आरोप को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए राहुल गांधी से प्रमाण पेश करने या माफी मांगने की मांग की।
आखिर क्या है पेपर लीक कानून?
पिछले कुछ वर्षों में NEET, UGC-NET, भर्ती परीक्षाओं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े किए। इन्हीं घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया था। इसका उद्देश्य संगठित तरीके से होने वाली परीक्षा धांधली, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और तकनीकी माध्यमों से की जाने वाली धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई करना है। अब पारित संशोधन विधेयक का उद्देश्य इस कानून को और अधिक प्रभावी बनाना तथा जांच और अभियोजन की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
कानून में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति या संगठित गिरोह परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करता है, उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ करता है, कंप्यूटर सिस्टम हैक करता है या परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करता है, तो उसके खिलाफ कठोर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में दोषियों को कई वर्षों तक कारावास और भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। यदि अपराध किसी संगठित नेटवर्क द्वारा किया जाता है, तो जांच एजेंसियों को भी व्यापक अधिकार प्राप्त होते हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों को नहीं बल्कि परीक्षा माफिया और संगठित अपराधियों को निशाना बनाना है।
सरकार ने क्यों बताया इसे जरूरी?
केंद्र सरकार का कहना है कि हर वर्ष करोड़ों छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। एक पेपर लीक लाखों युवाओं की मेहनत पर पानी फेर देता है और भर्ती प्रक्रिया पर जनता का विश्वास कमजोर करता है। सरकार का दावा है कि नया कानूनी ढांचा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा, पेपर लीक करने वाले संगठित गिरोहों पर लगाम लगाएगा और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के हितों की रक्षा करेगा।
विपक्ष ने किन मुद्दों को उठाया?
विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने केवल परीक्षा व्यवस्था ही नहीं बल्कि हालिया छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार जवाबदेह है। राहुल गांधी की टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि बिना किसी प्रमाण के इतने गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा कानून लागू होने के बाद कई मामलों में तेजी से कार्रवाई हुई है और दर्जनों एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
छात्रों के लिए यह कानून क्यों महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं केवल भर्ती प्रक्रिया नहीं बल्कि लाखों युवाओं के करियर और भविष्य से जुड़ी होती हैं। जब पेपर लीक होता है, तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों का नुकसान होता है, परीक्षाएं रद्द करनी पड़ती हैं और भर्ती प्रक्रिया में महीनों या वर्षों की देरी हो जाती है। सख्त कानून से परीक्षा माफिया पर अंकुश लगने, निष्पक्ष प्रतियोगिता सुनिश्चित करने और सरकारी भर्ती प्रणाली पर लोगों का विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
क्या केवल कानून से खत्म हो जाएगी पेपर लीक की समस्या?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित डिजिटल ट्रांसमिशन व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, साइबर सुरक्षा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और समयबद्ध जांच भी उतनी ही जरूरी है।
इसके अलावा राज्यों और केंद्र की जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा आधुनिक तकनीकों जैसे एन्क्रिप्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने की आवश्यकता है। पेपर लीक के बढ़ते मामलों ने देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में संसद से संशोधन विधेयक का पारित होना सरकार की उस कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसकी प्रभावी तरीके से कितनी सख्ती से पालना होती है, जांच कितनी तेज होती है और दोषियों को कितनी जल्दी सजा मिलती है। तभी करोड़ों छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास पूरी तरह बहाल किया जा सकेगा।
