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NEET परिणाम में कथित गड़बड़ी का मामला कोर्ट पहुंचा, छात्रा ने मांगी OMR की दोबारा जांच
NEET UG 2026 के परिणाम को चुनौती देते हुए मुंबई की एक छात्रा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। छात्रा का दावा है कि आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार उसके लगभग 410 अंक बनने चाहिए थे, जबकि परिणाम में उसे 340 अंक दिए गए। NTA को कई ईमेल भेजने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उसने अदालत से उत्तरपुस्तिका की दोबारा जांच और अंक संशोधित करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्वीकार करते हुए NTA से जवाब तलब किया है। यह मामला मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिकायत निवारण व्यवस्था पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
Anshuman Mishra30 जुल. 2026, 07:17 PM IST

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) 2026 के परिणाम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मुंबई की एक छात्रा ने अपने प्राप्त अंकों पर सवाल उठाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छात्रा का दावा है कि आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) के आधार पर उसके लगभग 410 अंक बनने चाहिए थे, जबकि घोषित परिणाम में उसे केवल 340 अंक मिले। इसी अंतर को लेकर उसने उत्तरपुस्तिका (OMR Answer Sheet) की दोबारा जांच और परिणाम में सुधार की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
याचिका के अनुसार छात्रा ने जून 2026 में आयोजित NEET UG परीक्षा दी थी। परीक्षा के बाद जारी आधिकारिक उत्तर कुंजी के आधार पर उसने अपने अंक मिलाए और उसे विश्वास था कि उसके लगभग 410 अंक बन रहे हैं। लेकिन जुलाई में परिणाम घोषित होने पर उसके केवल 340 अंक आए। छात्रा का कहना है कि उसने NTA को कई ईमेल भेजकर उत्तरपुस्तिका और स्कोर की जांच कराने का अनुरोध किया, लेकिन निर्धारित समय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के कारण उसने न्यायालय की शरण ली।
NEET UG क्या है और इसका महत्व कितना बड़ा है?
NEET UG भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके माध्यम से MBBS, BDS, AYUSH, BSc Nursing सहित कई मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। हर वर्ष 20 लाख से अधिक छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। कुछ अंकों का अंतर भी छात्र की रैंक, कॉलेज और मेडिकल सीट को पूरी तरह बदल सकता है। यही कारण है कि परिणाम से जुड़े विवादों को अत्यंत गंभीर माना जाता है।
छात्रा की मांग क्या है?
याचिका में छात्रा ने अदालत से अनुरोध किया है कि NTA को उसकी उत्तरपुस्तिका और मूल्यांकन प्रक्रिया की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया जाए। यदि मूल्यांकन में कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसके अंक संशोधित किए जाएं ताकि वह मेडिकल काउंसलिंग में अपने वास्तविक अंकों के आधार पर भाग ले सके। छात्रा का कहना है कि यदि समय पर फैसला नहीं हुआ तो काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और उसे अपूरणीय नुकसान हो सकता है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए NTA से जवाब मांगा है। अदालत अब यह तय करेगी कि क्या प्रथम दृष्टया ऐसा कोई आधार है जिसके कारण उत्तरपुस्तिका की पुनः जांच या मूल्यांकन आवश्यक हो। फिलहाल अदालत ने छात्रा के दावों को सही या गलत नहीं माना है। अंतिम निर्णय सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद ही होगा।
ऐसे मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता पर लगातार बहस हुई है। उत्तर कुंजी, OMR शीट, तकनीकी त्रुटियों और परिणामों में कथित विसंगतियों को लेकर कई छात्र अदालतों का रुख कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के बावजूद शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक तेज और प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि छात्रों को अदालत जाने की आवश्यकता कम पड़े।
छात्रों के लिए यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में कुछ अंकों का अंतर भी हजारों रैंक का अंतर पैदा कर सकता है। इससे छात्र को सरकारी मेडिकल कॉलेज, निजी कॉलेज या मनचाहा कोर्स मिलने पर सीधा असर पड़ता है। यदि मूल्यांकन में वास्तव में कोई त्रुटि होती है और उसका समय पर समाधान नहीं होता, तो छात्र का पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ पारदर्शी मूल्यांकन, समयबद्ध शिकायत निवारण और उत्तरपुस्तिका तक आसान पहुंच को आवश्यक मानते हैं।
NTA की भूमिका क्या है?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET UG, JEE Main, CUET और UGC-NET का आयोजन करती है। इसकी जिम्मेदारी निष्पक्ष परीक्षा, सुरक्षित मूल्यांकन और समय पर परिणाम घोषित करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षाओं में तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था को लगातार मजबूत करना जरूरी है ताकि छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बना रहे।
बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला केवल इस छात्रा के मामले तक सीमित नहीं रहेगा। यदि अदालत मूल्यांकन प्रक्रिया या शिकायत निवारण तंत्र को लेकर कोई महत्वपूर्ण निर्देश देती है, तो भविष्य में ऐसी परीक्षाओं के संचालन और पारदर्शिता पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। NEET UG 2026 के परिणाम को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा यह मामला एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अंतिम फैसला अदालत के पास है, लेकिन यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में सटीक मूल्यांकन, प्रभावी शिकायत निवारण और समय पर न्याय सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
