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सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ असम सरकार सख्त, परिवारों को मिला नोटिस
असम के धुबरी जिले में सरकारी जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। करीब 1000 परिवारों को नोटिस जारी कर जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश करने और प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान का हिस्सा है। वहीं, नोटिस पाने वाले परिवारों ने पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग उठाई है। मामले में अब प्रशासन भूमि रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

गुवाहाटी: असम के धुबरी जिले में सरकारी जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। जिला प्रशासन ने करीब 1,000 परिवारों को नोटिस जारी कर सरकारी जमीन खाली करने के लिए कहा है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अभियान का हिस्सा है। मामला धुबरी जिले के आलमगंज क्षेत्र का है, जहां प्रशासन के अनुसार लगभग 1,500 बीघा सरकारी खास जमीन पर कथित कब्जे की शिकायत मिली थी। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित परिवारों को नोटिस जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने को कहा है।
प्रशासन ने जारी किए शो-कॉज नोटिस
रिपोर्ट्स के अनुसार, धुबरी जिला प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में प्रभावित परिवारों से जमीन पर उनके अधिकार और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज नहीं पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने सरकारी जमीन को सार्वजनिक उपयोग और विकास कार्यों के लिए सुरक्षित रखने का हवाला देते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा रोकना प्रशासन की नियमित जिम्मेदारी का हिस्सा है।
परिवारों में बढ़ी चिंता
नोटिस मिलने के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता का माहौल है। कई परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और उनके सामने अब घर और आजीविका को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी उठाई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक सभी प्रभावित परिवारों के लिए किसी बड़े पुनर्वास पैकेज की जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई कानून और भूमि रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान
असम सरकार पिछले कुछ वर्षों से सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे हटाने के लिए अभियान चला रही है। राज्य सरकार का कहना है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कर उसका उपयोग सार्वजनिक परियोजनाओं, संरक्षण और विकास कार्यों के लिए किया जाना जरूरी है। भूमि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राज्य में समय-समय पर राजनीतिक बहस भी होती रही है। कुछ संगठन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखने की मांग करते हैं, जबकि सरकार का पक्ष है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को हटाना आवश्यक है।
जमीन विवादों में दस्तावेजों की भूमिका अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में भूमि रिकॉर्ड, पट्टा, स्वामित्व प्रमाण और अन्य दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जिन लोगों के पास वैध भूमि दस्तावेज होते हैं, वे प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान अपना पक्ष रख सकते हैं। राजस्व विभाग आमतौर पर जमीन के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है। इसलिए ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों के लिए अपने दस्तावेजों को सुरक्षित रखना और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है।
आगे क्या होगा?
धुबरी में जारी नोटिस के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई परिवारों के जवाब और भूमि रिकॉर्ड की जांच के आधार पर करेगा। यदि जमीन पर अवैध कब्जा साबित होता है तो प्रशासन नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर सकता है। यह मामला एक बार फिर सरकारी जमीन, अतिक्रमण हटाने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे मुद्दों को चर्चा में ले आया है।
