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जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे और सख्त! दो साल से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी होगी अनिवार्य; केंद्र सरकार ने लोकसभा में पेश किया विधेयक

देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा में पेश किए गए Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 के तहत यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) की अनुमति अनिवार्य होगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, गलत रिकॉर्ड और दस्तावेजों के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि, यह अभी केवल एक विधेयक है और संसद से पारित होने के बाद ही नया कानून लागू होगा।

Priyanka Gaikwad30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे और सख्त! दो साल से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी होगी अनिवार्य; केंद्र सरकार ने लोकसभा में पेश किया विधेयक
देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया अब पहले से अधिक सख्त होने जा रही है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 पेश करते हुए विलंब से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह विधेयक लोकसभा में पेश किया। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाना, नागरिकों की कानूनी पहचान को अधिक सुरक्षित बनाना और पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाना है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो अब केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा।

अभी तक ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर पंजीकरण किया जाता था। सरकार का मानना है कि दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक स्तर पर जांच आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोका जा सके। भारत में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण Registration of Births and Deaths Act, 1969 के तहत किया जाता है। इस कानून के अनुसार प्रत्येक जन्म और मृत्यु की जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर दर्ज कराना आवश्यक है। समय पर पंजीकरण होने से नागरिकों को भविष्य में सरकारी और कानूनी प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जन्म प्रमाणपत्र केवल जन्म का प्रमाण नहीं, बल्कि किसी भी नागरिक की कानूनी पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसका उपयोग स्कूल और कॉलेज में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, सरकारी नौकरी, छात्रवृत्ति, बैंकिंग सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कई अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए किया जाता है। वहीं, मृत्यु प्रमाणपत्र भी उत्तराधिकार, संपत्ति के हस्तांतरण, बीमा दावों, बैंक खाते बंद कराने, पेंशन प्रक्रिया और अन्य कानूनी कार्यों के लिए बेहद जरूरी दस्तावेज माना जाता है। सरकार के अनुसार, कई मामलों में जन्म या मृत्यु के कई वर्षों बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किए जाते हैं। ऐसे मामलों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए गलत जन्मतिथि दर्ज कराना, झूठी पहचान बनाना या सरकारी योजनाओं का गलत लाभ लेने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इसी वजह से सरकार ने दो वर्ष से अधिक देरी वाले मामलों में न्यायिक मंजूरी अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है।

नए नियम लागू होने के बाद दो वर्ष से अधिक विलंब वाले प्रत्येक मामले की न्यायिक स्तर पर जांच होगी। इससे गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज और रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। सरकार का यह भी मानना है कि इससे लोग जन्म और मृत्यु की जानकारी समय पर दर्ज कराने के लिए अधिक जागरूक होंगे। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानून में व्यापक बदलाव करते हुए डिजिटल डेटाबेस की व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत जन्म और मृत्यु से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ने तथा विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को आसान बनाया गया। अब 2026 का यह संशोधन उसी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि, आम लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि यह अभी केवल एक प्रस्तावित विधेयक है। इसे कानून बनने के लिए पहले लोकसभा और राज्यसभा से पारित होना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही यह पूरे देश में लागू होगा। तब तक जन्म और मृत्यु पंजीकरण की वर्तमान व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनेगी। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्रों और गलत रिकॉर्ड के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। यही कारण है कि इस संशोधन को देश की नागरिक पंजीकरण व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है।