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CBI का शिकंजा और कसता गया! PNB के 2,000 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड में कोर्ट का बड़ा एक्शन, चार आरोपियों को समन
देश के सबसे चर्चित बैंकिंग घोटालों में शामिल पंजाब नेशनल बैंक (PNB) लोन फ्रॉड मामले में जांच ने एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। मुंबई की विशेष CBI अदालत ने लगभग 2,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में दाखिल पूरक चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए चार आरोपियों के खिलाफ समन जारी कर दिए हैं, जिससे मामले की कानूनी कार्रवाई अब और तेज होने जा रही है।

मुंबई:
देश के चर्चित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) लोन फ्रॉड मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मुंबई की विशेष CBI अदालत ने करीब 2,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल पूरक (Supplementary) चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए चार आरोपियों के खिलाफ समन जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं और आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
CBI के अनुसार, वर्ष 2015 में गीतांजलि समूह (Gitanjali Group) की कुछ कंपनियों ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की मुंबई स्थित ब्रैडी हाउस शाखा के अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ कथित मिलीभगत कर फर्जी Letters of Undertaking (LoU) के आधार पर विदेशी बैंकों से खरीदार ऋण (Buyer's Credit) हासिल किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों का उल्लंघन कर बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।
किन आरोपियों के खिलाफ जारी हुआ समन?
विशेष CBI न्यायाधीश एस. के. करहाले ने नुब्रता मिश्रा, जयेश शाह, अजित भेड़ा और दीपेन शाह के खिलाफ समन जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि CBI द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं।
आरोप क्या हैं?
CBI की पूरक चार्जशीट में आरोपियों पर निम्न गंभीर आरोप लगाए गए हैं
• आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
• धोखाधड़ी (Cheating)
• आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)
• खातों में फर्जीवाड़ा (Falsification of Accounts)
• साक्ष्य मिटाने का प्रयास (Destruction of Evidence)
• भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत अपराध
अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया जारी करने का आदेश दिया।
संबंधित कानूनी घटनाक्रम
PNB घोटाले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और पिछले कुछ वर्षों में इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आए हैं।
मार्च 2025 में CBI ने एक अन्य पूरक चार्जशीट दाखिल कर भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की बहन पूर्ववी मेहता को भी आरोपी बनाया था। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अप्रैल 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की नियमित सुनवाई होगी। Bar & Bench की रिपोर्ट के अनुसार, CBI का कहना था कि पूर्ववी मेहता को पूरक चार्जशीट में नए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी बनाया गया है, जबकि वह ED के धनशोधन मामले में सरकारी गवाह (Approver) बन चुकी थीं। इससे पहले भी CBI ने PNB घोटाले में कई पूरक चार्जशीट दाखिल की हैं। वर्ष 2019 में एजेंसी ने नीरव मोदी के भाई नेहाल मोदी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल करते हुए साक्ष्य नष्ट करने और गवाहों को प्रभावित करने के आरोप भी जोड़े थे।
मामले की पृष्ठभूमि
PNB बैंक घोटाला भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में गिना जाता है। इस मामले में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। जांच के दौरान सामने आया कि बैंक की कोर बैंकिंग प्रणाली को दरकिनार कर SWIFT प्रणाली के माध्यम से फर्जी LoU जारी किए गए, जिनके आधार पर विदेशी बैंकों से ऋण प्राप्त किया गया। इस पूरे मामले की जांच CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) अलग-अलग कानूनों के तहत कर रहे हैं। नीरव मोदी फिलहाल ब्रिटेन में प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, जबकि मेहुल चोकसी के खिलाफ भी विभिन्न अदालतों में कार्रवाई जारी है।
अदालत ने क्या कहा?
विशेष CBI अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। अदालत का यह आदेश केवल चार्जशीट का संज्ञान लेने और मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से संबंधित है। आरोपियों का दोष या निर्दोष होना ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद ही तय होगा।
