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कांवड़ में 90 साल की सास को ला रही काजल चौधरी — सच में ‘श्रवण कुमार’ जैसी बहू!

सावन की कांवड़ यात्रा में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हर किसी को भावुक कर रही है। दिल्ली की काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर रही हैं। श्रवण कुमार की कथा को जीवंत करती इस यात्रा ने सेवा, संस्कार और परिवार के प्रति समर्पण का अनोखा संदेश दिया है।

Kashish Rai30 जुल. 2026, 07:17 PM IST
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कांवड़ में 90 साल की सास को ला रही काजल चौधरी — सच में ‘श्रवण कुमार’ जैसी बहू!

सावन मास की पवित्र कांवड़ यात्रा शुरू होते ही देशभर में भक्ति और आस्था का माहौल छा गया है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर बढ़ते कांवड़ियों की लंबी कतारें सड़कों पर नजर आ रही हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से गुजर रही एक अनोखी कांवड़ यात्रा लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है, जो सिर्फ आस्था ही नहीं बल्कि सेवा और समर्पण की मिसाल भी बन गई है। दिल्ली के शाहदरा निवासी काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चंद्रिदेवी को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की कठिन पैदल यात्रा कर रही हैं। कंधे पर कांवड़ और उसमें बैठी बुजुर्ग सास का दृश्य हर किसी को भावुक कर रहा है। राह चलते लोग इस नजारे को देखकर रुक जाते हैं और काजल के इस समर्पण की सराहना करते नजर आते हैं।


यह कोई पहली बार नहीं है जब काजल चौधरी ने ऐसा किया हो। जानकारी के मुताबिक, यह उनकी दूसरी कांवड़ यात्रा है। साल 2025 में भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक का सफर पूरा किया था। यही नहीं, इसी साल उन्होंने अपनी सास को कंधे पर बैठाकर 84 कोस की परिक्रमा भी की थी, जिसके बाद से वह लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। काजल चौधरी पेशे से एक गायिका हैं और देहाती रागनी व भजनों के जरिए सोशल मीडिया पर अच्छी-खासी पहचान बना चुकी हैं। उनकी भक्ति और सेवा का यह रूप लोगों को और ज्यादा प्रेरित कर रहा है। इस यात्रा में उनके छोटे पुत्र मनीष चौधरी समेत परिवार के अन्य सदस्य भी साथ चल रहे हैं, जो इस सफर को और भी खास बना रहा है।


बताया जा रहा है कि काजल चौधरी करीब 71 किलो गंगाजल के साथ अपनी सास को कांवड़ में बिठाकर यह यात्रा पूरी कर रही हैं। यह सफर शारीरिक रूप से जितना कठिन है, उतना ही भावनात्मक रूप से भी गहरा है। काजल का कहना है कि हर व्यक्ति को अपने माता-पिता और सास-ससुर की सेवा करनी चाहिए, ताकि वे जीवन के अंतिम समय में आशीर्वाद देकर जाएं। उनके अनुसार, यही सच्चा धर्म और कर्म है। इस भावुक यात्रा के दौरान काजल चौधरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी एक विशेष अपील की है। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि उनकी सास चंद्रिदेवी की इच्छा है कि वे मुख्यमंत्री से मिलें और उन्हें कुछ भेंट करें। काजल चाहती हैं कि उनकी सास की यह अंतिम इच्छा पूरी हो जाए।


काजल चौधरी की यह अनोखी कांवड़ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश भी है। आज के समय में जहां रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है, वहां यह कहानी सेवा, त्याग और परिवार के प्रति जिम्मेदारी का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। यह दृश्य हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि सच्ची भक्ति केवल भगवान के प्रति नहीं, बल्कि अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा में भी छिपी होती है।