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नासिक से ग्लासगो तक... संघर्ष की उड़ान बनी ऐतिहासिक उपलब्धि! सर्वेश कुशारे ने राष्ट्रमंडल खेलों में रजत जीतकर रचा इतिहास

महाराष्ट्र के नासिक के हाई जंप खिलाड़ी सर्वेश कुशारे ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुष हाई जंप स्पर्धा में ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया है। एक समय सांगली में सीमित सुविधाओं और भूसे के गड्ढे में अभ्यास करने वाले सरवेश आज राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष हाई जंप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनका संघर्ष, मेहनत और सफलता का सफर देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

Priyanka Gaikwad30 जुल. 2026, 07:18 PM IST
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नासिक से ग्लासगो तक... संघर्ष की उड़ान बनी ऐतिहासिक उपलब्धि! सर्वेश कुशारे ने राष्ट्रमंडल खेलों में रजत जीतकर रचा इतिहास
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के स्टार हाई जंप खिलाड़ी सर्वेश कुशारे ने पुरुष हाई जंप स्पर्धा में 2.25 मीटर की शानदार छलांग लगाकर ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वे राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पुरुष हाई जंप स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। नासिक जिले के निफाड तहसील स्थित देवगांव के रहने वाले सर्वेश कुशारे का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। शुरुआती दिनों में उन्होंने सांगली के छत्रपति शिवाजी स्टेडियम में बेहद साधारण सुविधाओं के बीच अभ्यास किया। उस समय आधुनिक हाई जंप मैट उपलब्ध नहीं होने के कारण वे भूसे के गड्ढे में कूदने का अभ्यास करते थे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और अथक मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।

फाइनल मुकाबले में सरवेश ने 2.25 मीटर की सफल छलांग लगाई। स्वर्ण पदक के लिए उनका मुकाबला जमैका के रोमन बेकफोर्ड से हुआ। दोनों खिलाड़ी 2.28 मीटर की ऊंचाई पार नहीं कर सके, लेकिन काउंटबैक नियम के आधार पर जमैका के खिलाड़ी को स्वर्ण पदक और सरवेश कुशारे को रजत पदक मिला। इससे पहले भी सर्वेश कुशारे ने डायमंड लीग में पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रचा था। उनकी लगातार शानदार उपलब्धियों ने भारत को पुरुष हाई जंप स्पर्धा में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

सर्वेश की इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA), एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) सहित कई दिग्गज खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों ने उन्हें बधाई दी। उनके पूर्व प्रशिक्षक एस. एल. पाटिल ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में वर्षों तक की गई मेहनत का परिणाम आज पूरे देश के सामने है। सर्वेश कुशारे की यह उपलब्धि केवल एक पदक की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। उनका सफर देश के लाखों युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देता है। भारत के लिए यह उपलब्धि एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने वाली साबित हुई है।