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हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस का बड़ा वादा! वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ शिकायत पर अब मिलेगी आधिकारिक रसीद
20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले एक व्यक्ति को शिकायत की आधिकारिक रसीद नहीं मिली। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। 30 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने स्वीकार किया कि तकनीकी खामी के कारण शिकायतों की पावती जारी नहीं हो रही थी और अदालत को आश्वासन दिया कि भविष्य में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मिलने वाली प्रत्येक शिकायत पर विधिवत रसीद जारी की जाएगी। हाईकोर्ट ने पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की जाने वाली शिकायतों के संबंध में शिकायतकर्ताओं को अब विधिवत रसीद (Acknowledgement Receipt) जारी की जाएगी। यह मामला 20 जुलाई 2026 को हुए "संसद चलो" मार्च के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ की गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि संसद मार्ग थाने में शिकायत देने के बावजूद उसे उसकी कोई प्राप्ति रसीद नहीं दी गई। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने स्वीकार किया कि मौजूदा ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Complaint Management System) में तकनीकी खामी (Technical Glitch) के कारण शिकायत दर्ज होने की पावती उपलब्ध नहीं हो रही थी। पुलिस ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस तकनीकी समस्या को दूर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और भविष्य में प्रत्येक शिकायतकर्ता को शिकायत दर्ज होने की आधिकारिक रसीद उपलब्ध कराई जाएगी। अदालत ने पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए 30 जुलाई 2026 को याचिका का निस्तारण कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
20 जुलाई 2026 को विभिन्न छात्र एवं वामपंथी संगठनों द्वारा "संसद चलो" (Sansad Chalo) मार्च का आयोजन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान संसद मार्ग, जनपथ और आसपास के इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। दिल्ली पुलिस के कई जवान घायल हुए, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में पुलिस ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए। जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपियों की पहचान की और हिंसा से जुड़े मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
इसी घटनाक्रम के बाद एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस उद्देश्य से उसने संसद मार्ग थाने के माध्यम से संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी, लेकिन उसे शिकायत प्राप्त होने की कोई रसीद (Acknowledgement Receipt) नहीं दी गई। शिकायतकर्ता का कहना था कि बिना रसीद के यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि शिकायत वास्तव में दर्ज हुई है या नहीं तथा उस पर आगे कोई कार्रवाई हो रही है या नहीं।
मामला हाईकोर्ट कैसे पहुंचा?
शिकायत की प्राप्ति रसीद नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि पुलिस यदि शिकायत स्वीकार भी करती है लेकिन उसकी कोई लिखित या डिजिटल पावती नहीं देती, तो शिकायतकर्ता के पास यह साबित करने का कोई माध्यम नहीं रहता कि उसने शिकायत दर्ज कराई थी। याचिका में अदालत से पुलिस को शिकायतों की पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई।
दिल्ली पुलिस ने अदालत में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायत की रसीद जारी न होने का कारण किसी शिकायत को दबाना नहीं था, बल्कि ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ी (Technical Glitch) थी। पुलिस ने अदालत को बताया कि इस तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिकायत दर्ज होते ही शिकायतकर्ता को उसकी आधिकारिक प्राप्ति रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे शिकायतों की ट्रैकिंग, निगरानी और निस्तारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनेगी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी शिकायतकर्ता को यह जानने का अधिकार है कि उसकी शिकायत संबंधित प्राधिकरण तक पहुंची है या नहीं। शिकायत की आधिकारिक पावती केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। अदालत ने माना कि भविष्य में न्यायिक या विभागीय कार्यवाही के दौरान भी यह एक अहम दस्तावेज के रूप में काम करती है। 30 जुलाई 2026 को पारित आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने कहा कि जब पुलिस शिकायतों पर प्राप्ति रसीद जारी करने की व्यवस्था लागू करने का आश्वासन दे रही है, तब फिलहाल किसी अतिरिक्त न्यायिक निर्देश की आवश्यकता नहीं है।
दिल्ली पुलिस के सुधारात्मक कदम
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि शिकायत निस्तारण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली में तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। इसके अलावा पुलिस ने हाल ही में "थाना दिवस-जन सुनवाई" जैसी पहल भी शुरू की है, जिसके तहत वरिष्ठ अधिकारी महीने में दो बार आम नागरिकों की शिकायतें सुनते हैं। इस पहल का उद्देश्य पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाना तथा शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यदि दिल्ली पुलिस का यह आश्वासन पूरी तरह लागू होता है तो
• प्रत्येक शिकायतकर्ता के पास शिकायत का आधिकारिक रिकॉर्ड होगा।
• शिकायत दर्ज होने या न होने को लेकर विवाद कम होंगे।
• वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों में जवाबदेही बढ़ेगी।
• शिकायतों की ऑनलाइन ट्रैकिंग आसान होगी।
• भविष्य में अदालतों और जांच एजेंसियों के समक्ष शिकायत का प्रमाण उपलब्ध रहेगा।
• पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता का विश्वास मजबूत होगा।
महत्वपूर्ण घटनाक्रम
• 20 जुलाई 2026: "संसद चलो" मार्च के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई हुई।
• हिंसा के बाद: संसद मार्ग थाने में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन शिकायतकर्ता को कोई रसीद नहीं मिली।
• शिकायतकर्ता ने रसीद नहीं मिलने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
• 30 जुलाई 2026: दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने शिकायतों पर आधिकारिक रसीद जारी करने का आश्वासन दिया।
• 30 जुलाई 2026: हाईकोर्ट ने पुलिस के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
