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युद्ध की चुनौतियों के बीच भी बदलेापुर से विदेश रवाना हुईं 1.60 लाख गणेश प्रतिमाएं, सात समंदर पार गूंजेगा बप्पा का जयघोष

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर से इस वर्ष भी बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं का निर्यात अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, यूरोप, दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में किया गया। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, समुद्री परिवहन में आई बाधाएं, कंटेनरों की कमी और बढ़ती शिपिंग लागत जैसी चुनौतियों के बावजूद करीब 1.60 लाख गणेश प्रतिमाएं समय पर विदेश भेजी गईं। मूर्तिकारों और निर्यातकों ने कठिन परिस्थितियों के बीच भी विदेशों में रहने वाले भारतीय श्रद्धालुओं तक बप्पा को समय पर पहुंचाने के लिए दिन-रात मेहनत की।

Priyanka Gaikwad30 जुल. 2026, 07:18 PM IST
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युद्ध की चुनौतियों के बीच भी बदलेापुर से विदेश रवाना हुईं 1.60 लाख गणेश प्रतिमाएं, सात समंदर पार गूंजेगा बप्पा का जयघोष
गणेशोत्सव भारत का सबसे लोकप्रिय धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, लेकिन अब इसकी भव्यता केवल देश तक सीमित नहीं रह गई है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, यूरोप, दुबई, सिंगापुर और दुनिया के कई अन्य देशों में बसे भारतीय समुदाय भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की स्थापना करते हैं। इसी कारण महाराष्ट्र के बदलापुर में बनने वाली गणेश प्रतिमाओं की विदेशों में हर साल भारी मांग रहती है। बदलापुर के मूर्तिकार पिछले कई वर्षों से विदेशों में गणेश प्रतिमाओं का निर्यात कर रहे हैं। प्रतिमाओं को विशेष पैकिंग के साथ कंटेनरों के जरिए समुद्री मार्ग से भेजा जाता है ताकि वे सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। इस वर्ष भी फरवरी से ही प्रतिमाओं की पैकिंग और निर्यात का कार्य शुरू हो गया था।

हालांकि इस बार पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक समुद्री परिवहन पर उसके प्रभाव ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी। कई समुद्री मार्ग प्रभावित हुए, कंटेनरों की उपलब्धता कम हो गई और मालभाड़ा (फ्रेट) पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया। इसके अलावा प्रतिमाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले फोम, कार्टन और अन्य सुरक्षा सामग्री की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे उत्पादन और निर्यात की कुल लागत बढ़ गई। इन चुनौतियों के बावजूद बदलापुर के मूर्तिकारों ने हार नहीं मानी। चिंतामणि क्रिएशन्स के मूर्तिकार निमेश जनवाड के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग 1.50 लाख गणेश प्रतिमाएं विदेश भेजी गई थीं, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर करीब 1.60 लाख तक पहुंच गई। सबसे अधिक प्रतिमाएं अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया भेजी गईं, जबकि इंग्लैंड, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, दुबई, सिंगापुर और मॉरीशस से भी अच्छी मांग रही।

निमेश जनवाड ने कहा कि युद्ध के कारण कुछ शिपमेंट में देरी जरूर हुई, लेकिन विदेशों में रहने वाले भारतीय श्रद्धालुओं तक गणेशोत्सव शुरू होने से पहले प्रतिमाएं पहुंचाना ही उनकी पहली प्राथमिकता थी। इसके लिए निर्यातकों ने समय से पहले कंटेनर बुक किए और वैकल्पिक शिपिंग मार्गों का भी सहारा लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति बढ़ते लगाव के कारण हर वर्ष गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ रही है। यही वजह है कि वैश्विक संकट और बढ़ती लागत के बावजूद महाराष्ट्र का यह पारंपरिक उद्योग लगातार आगे बढ़ रहा है।

 बदलापुर और महाराष्ट्र के अन्य मूर्तिकार अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति को दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  यह उपलब्धि केवल व्यापारिक सफलता नहीं, बल्कि भारतीय आस्था, संस्कृति और परंपरा के वैश्विक विस्तार का भी प्रतीक है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद बदलापुर के मूर्तिकारों ने यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो तो युद्ध और वैश्विक संकट जैसी चुनौतियां भी श्रद्धा और समर्पण के आगे छोटी पड़ जाती हैं।