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स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर सख्त प्रतिबंध! महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला
महाराष्ट्र सरकार ने राज्यभर के करीब दो करोड़ विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सभी सरकारी, निजी और अनुदानित स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री, वितरण और प्रचार पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत वड़ा पाव, समोसा, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट और अधिक चीनी, नमक व वसा (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर स्कूल प्रबंधन, कैंटीन संचालकों, आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Priyanka Gaikwad30 जुल. 2026, 07:18 PM IST

महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों में तेजी से बढ़ रहे मोटापे, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब राज्य के सभी सरकारी, निजी, अनुदानित और स्थानीय निकायों के स्कूलों के परिसर तथा उसके 50 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के जंक फूड की बिक्री, मुफ्त वितरण और विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह नियम राज्य के हजारों स्कूलों और करोड़ों विद्यार्थियों पर लागू होगा। FDA के अनुसार जिन खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में चीनी, नमक और वसा (HFSS) होती है, वे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। लगातार ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बच्चों में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, दांतों की समस्या, एकाग्रता में कमी और याददाश्त पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से स्कूलों के आसपास स्वस्थ खाद्य वातावरण तैयार करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों में वड़ा पाव, समोसा, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड चिप्स, नमकीन, चॉकलेट, कैंडी, बिस्कुट, केक, कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, आइसक्रीम और अधिक चीनी, नमक तथा वसा वाले अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा इन उत्पादों के पोस्टर, बैनर, होर्डिंग, प्रचार सामग्री या मुफ्त सैंपल भी स्कूलों के आसपास वितरित नहीं किए जा सकेंगे। नए आदेश के तहत प्रत्येक स्कूल में एक खाद्य सुरक्षा समिति गठित की जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि विद्यार्थियों को केवल सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन ही उपलब्ध कराया जाए। स्कूल कैंटीन संचालकों के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का वैध लाइसेंस अनिवार्य होगा।
साथ ही समय-समय पर खाद्य सुरक्षा ऑडिट, स्वच्छता निरीक्षण और भोजन की गुणवत्ता की जांच भी की जाएगी। स्कूलों को मौसमी फल, दूध, दही, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि कोई स्कूल, कैंटीन संचालक, आपूर्तिकर्ता या विक्रेता इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
साथ ही समय-समय पर खाद्य सुरक्षा ऑडिट, स्वच्छता निरीक्षण और भोजन की गुणवत्ता की जांच भी की जाएगी। स्कूलों को मौसमी फल, दूध, दही, अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि कोई स्कूल, कैंटीन संचालक, आपूर्तिकर्ता या विक्रेता इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि बच्चों की खानपान की आदतें कम उम्र में ही विकसित होती हैं। यदि स्कूलों के आसपास जंक फूड की उपलब्धता कम होगी और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा मिलेगा, तो भविष्य में मोटापा, मधुमेह और अन्य गैर-संचारी बीमारियों के मामलों में कमी लाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी कदम है।
