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QR कोड होने के बावजूद अधिकृत रेहड़ी-पटरी वालों पर कार्रवाई; उपमहापौर संजय घाडी हुए आक्रामक, आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

मुंबई में पंजीकृत और क्यूआर कोडधारी अधिकृत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं पर भी महानगरपालिका और पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इस मुद्दे को लेकर उपमहापौर संजय घाडी ने महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर अधिकृत फेरीवालों पर हो रही कार्रवाई तत्काल रोकने तथा टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन कर वेंडिंग और नो-वेंडिंग ज़ोन निर्धारित करने की मांग की है।

Priyanka Gaikwad01 अग. 2026, 02:47 PM IST
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QR कोड होने के बावजूद अधिकृत रेहड़ी-पटरी वालों पर कार्रवाई; उपमहापौर संजय घाडी हुए आक्रामक, आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
मुंबई में अवैध फेरीवालों पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पंजीकृत फेरीवालों को क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। 1 जून से शुरू हुए इस अभियान के तहत हजारों पात्र फेरीवालों को अधिकृत पहचान पत्र वितरित किए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिकृत और अवैध फेरीवालों के बीच स्पष्ट अंतर करना, अधिकृत विक्रेताओं की पहचान आसान बनाना तथा अवैध फेरीवालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना था।
लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।

क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र रखने वाले और महानगरपालिका में विधिवत पंजीकृत फेरीवालों पर भी महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन द्वारा कार्रवाई किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई फेरीवालों का आरोप है कि उनका सामान जब्त किया जा रहा है, उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है और उन्हें अपने निर्धारित स्थान पर व्यवसाय करने से भी रोका जा रहा है। इससे क्यूआर कोड प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं और अधिकृत फेरीवालों में नाराज़गी बढ़ गई है। इसी मुद्दे को लेकर उपमहापौर संजय घाडी ने महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि जिन फेरीवालों के पास क्यूआर कोड आधारित अधिकृत पहचान पत्र हैं, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। साथ ही प्रशासन स्पष्ट निर्देश जारी करे ताकि ऐसे फेरीवाले बिना किसी बाधा के अपना व्यवसाय कर सकें।

संजय घाडी ने यह भी मांग की कि मुंबई में जल्द से जल्द टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन किया जाए और शहर में वेंडिंग ज़ोन तथा नो-वेंडिंग ज़ोन का स्पष्ट निर्धारण किया जाए। उनका कहना है कि इससे अधिकृत फेरीवालों को निश्चित स्थान मिलेगा, यातायात और पैदल यात्रियों की समस्याएं कम होंगी तथा अवैध फेरीवालों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई करना संभव होगा। इससे लंबे समय से लंबित फेरीवालों की समस्या का स्थायी समाधान भी निकल सकेगा। उपमहापौर संजय घाडी के अनुसार, वर्ष 2014 में मुंबई के लगभग 99,435 फेरीवालों ने महानगरपालिका के पास पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। इनमें से 50,966 फेरीवालों को क्यूआर कोड आधारित अधिकृत पहचान पत्र वितरित किए जा चुके हैं। ऐसे में ये सभी फेरीवाले कानूनी रूप से अधिकृत हैं और उन्हें व्यवसाय करने का पूरा अधिकार है। इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई होना महानगरपालिका की नीति और उसके क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्यूआर कोड प्रणाली लागू करने का मुख्य उद्देश्य अधिकृत फेरीवालों की पहचान सुनिश्चित करना और केवल अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई करना था। लेकिन यदि अधिकृत फेरीवाले ही कार्रवाई का शिकार हो रहे हैं, तो इस पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। इसलिए प्रशासन से मांग की जा रही है कि वह तत्काल स्पष्ट नीति लागू करे, अधिकृत फेरीवालों को संरक्षण प्रदान करे और केवल अवैध फेरीवालों के खिलाफ ही सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महानगरपालिका प्रशासन उपमहापौर संजय घाडी की मांगों पर क्या निर्णय लेता है। क्या क्यूआर कोडधारी अधिकृत फेरीवालों को राहत मिलेगी, क्या टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन होगा और क्या फेरीवालों की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकल पाएगा इस पर मुंबई के हजारों फेरीवालों और आम नागरिकों की नजरें टिकी हुई हैं।