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"स्वच्छ मुंबई, हरित मुंबई" का सपना अधूरा! कचरा प्रबंधन की खामियों पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुंबई में बढ़ती कचरा समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बीएमसी और नागरिकों दोनों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि शहर की सड़कों, समुद्र तटों, नालों और सार्वजनिक स्थानों पर फैले कचरे को देखकर "स्वच्छ मुंबई, हरित मुंबई" का नारा केवल कागजों तक सीमित दिखाई देता है। अदालत ने धरोहर स्थलों के आसपास जमा कचरे को सात दिनों के भीतर हटाने का आदेश देते हुए ठोस कचरा प्रबंधन में तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।

Priyanka Gaikwad01 अग. 2026, 02:56 PM IST
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"स्वच्छ मुंबई, हरित मुंबई" का सपना अधूरा! कचरा प्रबंधन की खामियों पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुंबई शहर और उपनगरों की सड़कों पर जगह-जगह फैले कचरे को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को गहरी चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने सवाल उठाया कि जब शहर की सड़कें, सार्वजनिक स्थान, समुद्र तट और नाले कचरे से पटे हुए हैं, तो क्या बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का "स्वच्छ मुंबई, हरित मुंबई" का नारा वास्तव में लागू हो रहा है? अदालत ने कहा कि नागरिकों और महापालिका दोनों की निष्क्रियता के कारण यह सपना अधूरा रह गया है। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान बीएमसी को फटकार लगाते हुए मुंबई के धरोहर स्थलों के आसपास जमा कचरे पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी प्रमुख धरोहर स्थलों के आसपास का कचरा सात दिनों के भीतर हटाया जाए। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित विभागीय अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने नागरिकों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि भारत में लोग खुलेआम कचरा फैलाते हैं, लेकिन विदेशों में वही लोग स्वच्छता के नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं। अदालत ने पूछा कि क्या यही लोकतंत्र और स्वतंत्रता की कीमत है? क्या हम वास्तव में एक सभ्य समाज में रह रहे हैं? अदालत ने कहा कि स्वच्छ वातावरण का अधिकार तभी संभव है, जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वच्छता बनाए रखने का कर्तव्य निभाए। कांजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाली दुर्गंध और गैस उत्सर्जन से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि समस्या केवल कांजूरमार्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मुंबई शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर कमियों को उजागर करती है। अदालत ने कहा कि शहर की सड़कों, समुद्र तटों, नालों और सार्वजनिक स्थानों पर फैला कचरा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कई जगह कूड़ेदान मौजूद होने के बावजूद कचरा उसके बाहर फेंका जा रहा है।

अदालत ने पश्चिमी एक्सप्रेस हाईवे का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी सड़क किनारे प्लास्टिक और कचरे के बड़े-बड़े ढेर दिखाई देते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि "स्वच्छ मुंबई, हरित मुंबई" का नारा नागरिकों और बीएमसी दोनों की लापरवाही के कारण विफल हो रहा है। अदालत ने बीएमसी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) को ठोस कचरा प्रबंधन में तत्काल सुधार करने और विशेष रूप से मानसून के दौरान प्रभावी उपाय लागू करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि कचरे के कारण शहर में गंभीर स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। मुख्य सड़कों और गलियों में फैले कचरे से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए बीएमसी को अपने स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों के साथ समन्वय स्थापित कर यह अध्ययन करना चाहिए कि कचरे का लोगों के स्वास्थ्य पर कितना गंभीर प्रभाव पड़ रहा है और इससे निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दक्षिण मुंबई के प्रमुख धरोहर स्थलों—मुंबई हाईकोर्ट, मुंबई सिटी सिविल कोर्ट, राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान, राजाबाई टॉवर और हॉर्निमन सर्कल—के आसपास फैली गंदगी पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक इन स्थानों पर आते हैं, लेकिन कचरे और दुर्गंध के कारण उन्हें नाक पर रुमाल रखकर चलना पड़ता है। इससे मुंबई की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच रहा है। बीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल साखरे ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर सोमवार को आपात बैठक बुलाकर समाधान निकाला जाएगा।

इस पर अदालत ने पूछा कि क्या हर बार कार्रवाई के लिए न्यायालय के आदेश का इंतजार करना जरूरी है? अदालत ने बीएमसी और एमपीसीबी को तत्काल प्रभाव से कचरा प्रबंधन सुधारने तथा सभी संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए अदालत ने अंत में निर्वाचित नगरसेवकों को भी आड़े हाथों लिया। अदालत ने कहा कि केवल चुनाव के समय वोट मांगने के लिए जनता के बीच जाने के बजाय अपने-अपने वार्डों में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए भी गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ मुंबई के निर्माण के लिए नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।