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"शव को जानवर की तरह घसीटा गया": IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में बड़ा फैसला, ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में छह साल बाद बड़ा न्यायिक फैसला आया है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने हत्या को "बेहद बर्बर और अमानवीय" बताते हुए पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि फांसी की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि भारतीय कानून में मृत्युदंड केवल "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" मामलों में ही अंतिम विकल्प होता है।

Sonali01 अग. 2026, 03:19 PM IST
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"शव को जानवर की तरह घसीटा गया": IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में बड़ा फैसला, ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद

नई दिल्ली: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। अदालत ने इस हत्या को अत्यंत क्रूर और अमानवीय बताते हुए कहा कि पीड़ित के शव के साथ "जानवर जैसा व्यवहार" किया गया और उसे घसीटकर नाले में फेंक दिया गया। हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस की फांसी की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मृत्युदंड केवल "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" मामलों में अंतिम विकल्प के रूप में दिया जाता है। 


क्या कहा अदालत ने?

कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रवीण सिंह ने 31 जुलाई 2026 को सजा सुनाते हुए कहा कि यह अपराध नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बीच हुआ था। अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा को केवल उनके धर्म के आधार पर हिंसक भीड़ ने निशाना बनाया। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि हमला इतना बर्बर था कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर तुरंत जमीन पर नहीं गिरा। इसके बाद शव को जानवर की तरह बांधकर चांदबाग पुलिया तक घसीटा गया और फिर नाले में फेंक दिया गया। अदालत ने इस पूरी घटना को "बेहद वीभत्स और घृणित" करार दिया। 


फांसी की मांग क्यों हुई खारिज?

सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक (SPP) मधुकर पांडे ने अदालत से सभी दोषियों को फांसी देने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि यह अपराध अत्यंत निर्मम था और "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी में आता है। लेकिन अदालत ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड अंतिम उपाय (Last Resort) है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि दोषियों के सुधार और पुनर्वास की कोई संभावना नहीं बची है। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष यह दिखाने में असफल रहा कि दोषियों का पहले से हिंसक आपराधिक इतिहास रहा है या वे भविष्य में समाज के लिए स्थायी खतरा बनेंगे। इसलिए उम्रकैद की सजा उचित होगी। 


मामले में कौन-कौन दोषी ठहराए गए?

13 जुलाई 2026 को अदालत ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन को हत्या, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया था। हालांकि उन्हें आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) के आरोप से बरी कर दिया गया।

इसी मामले में नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया। वहीं हसीन, फिरोज, गुलफाम, सोयब, समीर खान और मुन्ताजिम को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया गया। 


बचाव पक्ष ने क्या कहा?

ताहिर हुसैन के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि मृत्युदंड केवल अत्यंत दुर्लभ मामलों में ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुकदमे के दौरान आपराधिक साजिश का आरोप सिद्ध नहीं हुआ। बचाव पक्ष ने ताहिर हुसैन के जेल में अच्छे आचरण और सुधार की संभावना का भी हवाला दिया।

सजा सुनाए जाने के बाद ताहिर हुसैन ने फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। 


क्या है पूरा मामला?

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में CAA और NRC के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान व्यापक सांप्रदायिक हिंसा हुई थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। 25 फरवरी 2020 को 26 वर्षीय IB कर्मचारी अंकित शर्मा अपने घर से निकले थे, जिसके बाद वे लापता हो गए। अगले दिन उनका शव चांदबाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन और अन्य आरोपी हिंसक भीड़ का हिस्सा थे और इसी भीड़ ने अंकित शर्मा की हत्या की थी। अदालत ने पांच प्रत्यक्षदर्शियों, फॉरेंसिक साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध माना। 


मामले की प्रमुख टाइमलाइन

• 25 फरवरी 2020: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान अंकित शर्मा लापता हुए।
• 26 फरवरी 2020: चांदबाग के नाले से उनका शव बरामद हुआ।
• मार्च 2023: अदालत ने ताहिर हुसैन सहित 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए।
• 13 जुलाई 2026: ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपी दोषी करार।
• 28 जुलाई 2026: दिल्ली पुलिस ने फांसी की मांग की।
• 31 जुलाई 2026: कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई और मृत्युदंड की मांग खारिज कर दी।