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कश्मीर में आतंक का नया हमला: छत्तीसगढ़ के 2 प्रवासी मजदूरों को पॉइंट ब्लैंक रेंज से मारी गोली, दोनों की मौत

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने एक बार फिर बेगुनाह प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की कोशिश की है। कुलगाम जिले के किलम गांव में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की बेहद करीब से गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हमले ने घाटी में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Sonali01 अग. 2026, 03:20 PM IST
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कश्मीर में आतंक का नया हमला: छत्तीसगढ़ के 2 प्रवासी मजदूरों को पॉइंट ब्लैंक रेंज से मारी गोली, दोनों की मौत

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर आतंकियों ने निर्दोष प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर खौफ फैलाने की कोशिश की है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के किलम गांव में आतंकवादियों ने छत्तीसगढ़ के दो ईंट-भट्ठा मजदूरों को बेहद नजदीक से गोली मार दी। हमले में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने शनिवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह अक्टूबर 2024 के बाद घाटी में प्रवासी मजदूरों पर पहला बड़ा आतंकी हमला है और जुलाई महीने में दक्षिण कश्मीर में हुआ दूसरा आतंकी हमला भी है।


पुलिस के अनुसार, यह हमला शुक्रवार (31 जुलाई 2026) की शाम कुलगाम के किलम (Kilam) गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर हुआ। आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के रहने वाले दो मजदूरों पर पॉइंट ब्लैंक रेंज से फायरिंग की। दीपक नामक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र को पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार और सर्जरी के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) रेफर किया गया, जहां शनिवार (1 अगस्त) सुबह उन्होंने भी दम तोड़ दिया।


मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दोनों मृतकों के परिजनों के लिए 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (Ex-Gratia) देने की घोषणा की। उन्होंने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना कायराना और अमानवीय कृत्य है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सुरक्षा बलों को आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने और हमले में शामिल आतंकवादियों को जल्द से जल्द ढेर करने के निर्देश दिए। पूरे इलाके की घेराबंदी कर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।


राजनीतिक दलों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इसे "निरर्थक और अमानवीय हिंसा" बताया, जबकि सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि सुरक्षा के दावों के बावजूद ऐसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।


क्या है पूरा मामला?

31 जुलाई 2026 की शाम कुलगाम जिले के किलम गांव में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे दो प्रवासी मजदूरों को आतंकियों ने निशाना बनाया। दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और रोजी-रोटी कमाने के लिए कश्मीर में काम कर रहे थे। आतंकियों ने बेहद करीब से दोनों पर गोलियां चलाईं। एक मजदूर की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अगले दिन अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सुरक्षा एजेंसियां हमले में शामिल आतंकियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही हैं।

पिछले छह वर्षों में 25 से अधिक प्रवासी मजदूरों की हत्या


आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी हमलों में 25 से अधिक प्रवासी मजदूरों की जान जा चुकी है। इससे पहले 18 अक्टूबर 2024 को बिहार के अशोक चौहान की हत्या की गई थी। इसके दो दिन बाद श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर जेड-मोड़ (Z-Morh) सुरंग के बेस कैंप पर हुए आतंकी हमले में छह प्रवासी मजदूरों और एक स्थानीय डॉक्टर की भी मौत हुई थी।


मामले की प्रमुख टाइमलाइन

• 31 जुलाई 2026: कुलगाम के किलम गांव में आतंकियों ने दो प्रवासी मजदूरों पर फायरिंग की।
• 31 जुलाई 2026: दीपक की मौके पर मौत, भूपेंद्र गंभीर रूप से घायल।
• 1 अगस्त 2026: SKIMS श्रीनगर में इलाज के दौरान भूपेंद्र की भी मौत।
• 1 अगस्त 2026: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दोनों परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की।