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स्टेशन मास्टर अब संभालेंगे आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी, रेलवे ने बनाया नोडल अधिकारी

रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पश्चिम रेलवे ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुपालन में मुंबई मंडल के सभी स्टेशन मास्टर और स्टेशन अधीक्षकों को आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब स्टेशन परिसर में आवारा कुत्तों की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी को तत्काल कार्रवाई करनी होगी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर समस्या का समाधान सुनिश्चित करना होगा।

Priyanka Gaikwad01 अग. 2026, 03:25 PM IST
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स्टेशन मास्टर अब संभालेंगे आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी, रेलवे ने बनाया नोडल अधिकारी
रेलवे स्टेशनों पर हर दिन लाखों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर और स्टेशन परिसर में आवारा कुत्तों की बढ़ती आवाजाही यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। कई बार आवारा कुत्ते यात्रियों के पीछे दौड़ते हैं, खाने-पीने की वस्तुओं के लिए प्लेटफॉर्म पर घूमते हैं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे दुर्घटना और डॉग बाइट जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे के मुंबई मंडल ने 30 जुलाई 2026 को एक अहम आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत सभी स्टेशन अधीक्षक और स्टेशन मास्टर (प्रभारी) को अपने-अपने रेलवे स्टेशन का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों तथा रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। अब किसी भी स्टेशन पर आवारा कुत्ते दिखाई देने या उससे संबंधित शिकायत मिलने पर संबंधित नोडल अधिकारी को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। शिकायतों की अनदेखी नहीं की जा सकेगी और प्रत्येक मामले की निगरानी तथा रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें नियमित रूप से स्टेशन परिसर का निरीक्षण करना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, फुटओवर ब्रिज, टिकट काउंटर, प्रवेश और निकास द्वार सहित पूरे स्टेशन परिसर में आवारा कुत्तों का प्रवेश न हो।

इसके लिए स्थानीय नगर निगम, पशु नियंत्रण विभाग और अन्य संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाने होंगे। साथ ही समय-समय पर निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार कर उसका रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा। रेलवे प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रत्येक स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर नोडल अधिकारी का नाम, पद और संपर्क नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए। इससे यात्रियों को यदि स्टेशन परिसर में कोई आवारा कुत्ता दिखाई देता है या किसी प्रकार की परेशानी होती है, तो वे सीधे जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क कर सकेंगे। इससे शिकायतों के त्वरित निस्तारण के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।

रेलवे अधिकारियों को स्टेशन परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी उपाय अपनाने होंगे। जरूरत पड़ने पर स्थानीय निकायों की सहायता से आवारा कुत्तों को सुरक्षित तरीके से हटाया जाएगा। साथ ही स्टेशन परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने, खुले में खाद्य पदार्थों के अवशेष न रहने देने और ऐसे स्थानों की पहचान करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, जहां आवारा कुत्तों के जमा होने की संभावना अधिक रहती है। रेलवे का मानना है कि इस नई व्यवस्था से यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में उल्लेखनीय सुधार होगा। शिकायतों का तेजी से समाधान होगा, स्टेशन परिसर अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनेगा तथा रेलवे और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ और निर्बाध यात्रा का अनुभव प्रदान करना है, ताकि रेलवे स्टेशनों पर आवारा कुत्तों से होने वाली समस्याओं पर प्रभावी रूप से नियंत्रण पाया जा सके।