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रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीयों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! DNA जांच के बाद ही परिजनों को सौंपे जाएंगे शव
रोजगार की तलाश में रूस गए कई भारतीय कभी अपने घर नहीं लौट सके। अब उनके परिवारों की पीड़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि युद्ध में मारे गए भारतीयों के शव DNA जांच के बाद ही परिजनों को सौंपे जाएं। साथ ही विदेश मंत्रालय को मुआवजा दिलाने, शवों की स्वदेश वापसी और हर परिवार के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया गया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के परिवारों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। 31 जुलाई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया कि मृत भारतीय नागरिकों के शव उनके परिजनों को सौंपने से पहले DNA प्रोफाइलिंग के माध्यम से उनकी पहचान सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो शवों की स्वदेश वापसी, मुआवजे की प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं में सहायता करेगा।
मामला क्या है?
यह मामला "दिव्या बनाम भारत संघ" [W.P.(C) No. 451/2026] से जुड़ा है। याचिका उन 26 भारतीय नागरिकों के परिवारों की ओर से दायर की गई, जिनके बारे में आरोप है कि वे रोजगार के अवसरों की तलाश में रूस गए थे, लेकिन वहां उनके पासपोर्ट और पहचान संबंधी दस्तावेज कथित रूप से जब्त कर उन्हें रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर कर दिया गया। बाद में इनमें से कई भारतीय रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मारे गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मृतकों के शवों की पहचान ठीक से नहीं हो रही है, DNA मिलान नहीं कराया जा रहा और मुआवजा मिलने की प्रक्रिया भी लंबित है। उन्होंने मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप भी उठाए और अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।
केंद्र सरकार ने अदालत को क्या बताया?
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार लगातार प्रभावित परिवारों के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में परिवारों ने स्वयं DNA नमूने देने से इनकार किया था। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस से किसी शव को भारत लाने की प्रक्रिया संबंधित परिवार की ओर से अनुरोध किए जाने के बाद शुरू की जाती है। ASG ने अदालत को यह भी बताया कि रूसी सेना में कुल 219 भारतीय नागरिक शामिल हुए थे। इनमें से 139 को सेवा से मुक्त करा लिया गया है। 51 भारतीयों के मृत या लापता होने की सूचना है, जिनमें से 29 के पार्थिव शरीर अब तक भारत लाए जा चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट के चार अहम निर्देश
सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को निम्नलिखित निर्देश दिए—
विदेश मंत्रालय प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जिसके संपर्क विवरण सभी परिवारों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
किसी भी मृत भारतीय नागरिक का शव परिजनों को सौंपने से पहले DNA प्रोफाइलिंग कराई जाएगी और DNA मिलान प्रमाणपत्र के साथ ही शव परिवार को सौंपा जाएगा।
रूसी अधिकारियों से मुआवजा प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन संबंधी जानकारी परिवारों को उपलब्ध कराई जाएगी। परिवार चाहें तो विदेश मंत्रालय के माध्यम से अपने दावे प्रस्तुत कर सकेंगे। हालांकि मुआवजे की प्रक्रिया लंबित रहने का आधार बनाकर शवों की वापसी या अंतिम संस्कार में देरी नहीं की जाएगी।
जिला एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) प्रभावित परिवारों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराएंगे ताकि वे DNA जांच और मुआवजा दावा प्रक्रिया पूरी कर सकें।
पहले क्या हुआ था?
इस मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 26 भारतीयों में से 10 की युद्ध के दौरान मौत हो चुकी है। सरकार का कहना था कि अधिकांश भारतीयों ने रूसी सेना के साथ स्वेच्छा से अनुबंध किया था, हालांकि कुछ लोगों को एजेंटों द्वारा गुमराह किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया। अदालत ने तब सरकार से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी थी और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा था।
अदालत की टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है?
यह आदेश उन भारतीय परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो महीनों से अपने प्रियजनों के शवों की पहचान, स्वदेश वापसी और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर परेशान थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतकों की पहचान वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित करना और परिवारों को सम्मानपूर्वक शव सौंपना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही विदेश मंत्रालय को पूरे मामले में समन्वयकारी भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।
केस विवरण
मामला: Divya v. Union of India
याचिका संख्या: W.P.(C) No. 451/2026
सुनवाई की तिथि: 31 जुलाई 2026
पीठ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहन
