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Hepatitis Elimination Mission: भारत में जांच और इलाज को लेकर सरकार का बड़ा प्लान

विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2026 के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, समय पर जांच, उपचार की उपलब्धता और रोकथाम के उपायों को मजबूत करके इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

Vindhya Dubey01 अग. 2026, 03:31 PM IST
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Hepatitis Elimination Mission: भारत में जांच और इलाज को लेकर सरकार का बड़ा प्लान


हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस संक्रमण, इसके कारणों, बचाव और इलाज के बारे में जागरूक करना है। वर्ष 2026 का अभियान हेपेटाइटिस के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को तेज करने और बीमारी की रोकथाम के लिए सामूहिक भागीदारी पर केंद्रित है।

भारत में हेपेटाइटिस नियंत्रण के लिए सरकार के प्रयास

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) के माध्यम से देशभर में हेपेटाइटिस बी और सी की जांच, उपचार और निगरानी को मजबूत किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत उच्च जोखिम वाले समूहों की स्क्रीनिंग, मुफ्त जांच सुविधाएं, एंटीवायरल दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हेपेटाइटिस बी के संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण कार्यक्रम को भी मजबूत किया गया है। नवजात शिशुओं और बच्चों को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन देकर संक्रमण के खतरे को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

हेपेटाइटिस क्या है और क्यों चिंता का विषय है?

हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें लिवर में सूजन हो जाती है। यह मुख्य रूप से हेपेटाइटिस वायरस के कारण होता है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई इसके प्रमुख प्रकार हैं। हेपेटाइटिस बी और सी लंबे समय तक शरीर में बने रह सकते हैं और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लाखों लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस संक्रमण से प्रभावित हैं और हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत इससे जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है।

रोकथाम के लिए जागरूकता जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस से बचाव के लिए सावधानी बेहद जरूरी है। सुरक्षित रक्त संक्रमण, संक्रमित सुई और उपकरणों से बचाव, सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं और टीकाकरण संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हेपेटाइटिस सी के लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन आधुनिक एंटीवायरल उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं हेपेटाइटिस बी के लिए प्रभावी टीका मौजूद है।

2030 तक उन्मूलन का लक्ष्य

भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक लक्ष्य के अनुरूप वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को समाप्त करने का संकल्प लिया है। इसके लिए बीमारी की पहचान बढ़ाना, मरीजों को समय पर उपचार देना और संक्रमण के नए मामलों को रोकना प्रमुख रणनीति है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेपेटाइटिस के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। नियमित जांच, टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी के माध्यम से इस बीमारी के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।