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पेपर लीक करने वालों की अब खैर नहीं! राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ सबसे सख्त कानून, 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माना

देशभर में पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से नाराज़ लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया पर सबसे कड़ी कार्रवाई होगी। नए कानून के तहत दोषियों को 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ तक का जुर्माना, दो महीने में जांच और तीन महीने में ट्रायल पूरा करने जैसे सख्त प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।

Sonali01 अग. 2026, 03:38 PM IST
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पेपर लीक करने वालों की अब खैर नहीं! राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ सबसे सख्त कानून, 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माना

नई दिल्ली। देशभर में पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ केंद्र सरकार ने कानून को और अधिक सख्त बना दिया है। 31 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026) को अपनी मंजूरी दे दी। संसद से पारित इस संशोधन कानून के लागू होने के बाद सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। यह संशोधन लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में बदलाव करता है। यह जानकारी आधिकारिक विधायी प्रक्रिया और प्रकाशित रिपोर्टों में भी सामने आई है।

पेपर लीक विवाद के बाद आया कानून

केंद्र सरकार यह संशोधन ऐसे समय लेकर आई जब देश के विभिन्न हिस्सों में परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों का व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ। इसी घटनाक्रम के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा दिया था। सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना और नकल माफिया पर प्रभावी रोक लगाना है।

अब कितनी होगी सजा?

संशोधित कानून के तहत परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए न्यूनतम सजा 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है, जबकि अधिकतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दी गई है।

इसके अलावा अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दिया गया है।

परीक्षा एजेंसियों और कंपनियों पर भी सख्ती

यदि कोई सेवा प्रदाता (Service Provider) परीक्षा संबंधी अपराध में शामिल पाया जाता है तो उस पर अधिकतम ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। पहले यह सीमा ₹1 करोड़ थी।

ऐसी संस्थाओं को सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से 8 वर्ष तक प्रतिबंधित किया जा सकेगा। पहले यह अवधि 4 वर्ष थी।

यदि किसी कंपनी के निदेशक या वरिष्ठ प्रबंधन की संलिप्तता पाई जाती है तो उन्हें न्यूनतम 5 वर्ष की जेल और ₹5 करोड़ तक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

संगठित नकल गिरोहों पर और कड़ा प्रहार

संगठित परीक्षा अपराधों के लिए भी सजा बढ़ा दी गई है। अब ऐसे मामलों में न्यूनतम 7 वर्ष की कैद और कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना लगाया जा सकेगा। पहले न्यूनतम सजा 5 वर्ष और न्यूनतम जुर्माना ₹1 करोड़ था।

जांच और ट्रायल की समय सीमा तय

कानून में पहली बार जांच और मुकदमे के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित की गई है।

  • जांच अधिकतम 2 महीने में पूरी करनी होगी।

  • आरोपपत्र दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई होगी।

  • ट्रायल 3 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्र सरकार को इस कानून के तहत विशेष जांच दल (Special Task Force) गठित करने और आवश्यक होने पर केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंपने का भी अधिकार दिया गया है।

हर राज्य में बनेंगे स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट

संशोधित कानून के अनुसार प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को संबंधित हाईकोर्ट से परामर्श कर एक सत्र न्यायालय (Court of Session) को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित करना होगा। इस कानून के तहत लंबित सभी मामलों का ट्रायल भी इन्हीं अदालतों में होगा।

अपील के लिए भी नई व्यवस्था

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों के खिलाफ संबंधित हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की जा सकेगी। कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसी अपीलों का निस्तारण यथासंभव तीन महीने के भीतर किया जाए। जमानत संबंधी आदेशों के खिलाफ अपील की व्यवस्था भी जोड़ी गई है।

सरकार ने क्यों किया संशोधन?

सरकार के अनुसार हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और संगठित नकल के मामलों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इसी कारण कानून को और अधिक प्रभावी बनाने, जांच और सुनवाई में तेजी लाने तथा कड़ी सजा के माध्यम से अपराधियों में भय पैदा करने के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है।

प्रमुख बदलाव एक नजर में

  • राष्ट्रपति ने 31 जुलाई 2026 को संशोधन कानून को मंजूरी दी।

  • नकल करने वालों की न्यूनतम सजा 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष।

  • अधिकतम जुर्माना ₹50 लाख।

  • संगठित परीक्षा अपराधों में न्यूनतम 7 वर्ष की जेल।

  • संगठित अपराधों में न्यूनतम ₹10 करोड़ जुर्माना।

  • जांच 2 महीने में पूरी होगी।

  • ट्रायल 3 महीने में पूरा करने का लक्ष्य।

  • हर राज्य में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट।

  • हाईकोर्ट में अपील की अलग व्यवस्था।