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पश्चिम बंगाल में ISI के हनीट्रैप मॉड्यूल का भांडाफोड, राजनेताओं की जासूसी में महिला एजेंट अर्पिता सरकार गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बर्दवान और झारखंड के साहिबगंज में बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आईएसआई और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय हनीट्रैप और जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ ने बर्दवान के रेनेसां टाउनशिप से मुख्य संदिग्ध हमीम मंडल और उसकी सहयोगी अर्पिता सरकार को हिरासत में लिया है, जो भारतीय राजनेताओं, वीआईपी और प्रशासनिक अधिकारियों को जाल में फंसाकर गोपनीय जानकारी सीमा पार भेज रहे थे।
Kalpana Gautam01 अग. 2026, 05:24 PM IST

यह कार्रवाई देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क और कुख्यात शहजाद भट्टी गैंग से सीधे जुड़े हुए थे। इस मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य भारतीय राजनेताओं, वीआईपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख पदाधिकारियों की रेकी करना, उनकी संवेदनशील जानकारी जुटाना और देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करना था।
एसटीएफ की जांच के अनुसार, 24 वर्षीय आरोपी हमीम मंडल खुद को आईटी क्षेत्र का कर्मचारी बताकर बर्दवान के पॉश रेनेसां टाउनशिप में किराए का मकान लेकर रह रहा था। वह बीते एक साल से सोशल मीडिया के जरिए सीमा पार अपने आकाओं के संपर्क में था। हमीम के पास से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से यह बात सामने आई है कि वह नेताओं और उच्च अधिकारियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा था। मामले में दूसरा बड़ा मोड़ तब आया जब हमीम की सघन पूछताछ के आधार पर एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहरवा इलाके में छापा मारकर अर्पिता सरकार नाम की महिला को गिरफ्तार किया। अर्पिता का इस्तेमाल हनीट्रैप नेटवर्क के मुख्य चेहरे के रूप में किया जा रहा था। वह सोशल मीडिया और निजी संपर्कों के माध्यम से प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों तथा सरकारी अधिकारियों को अपने सौंदर्य के जाल में फंसाती थी और उनसे गोपनीय व व्यक्तिगत जानकारियां हासिल कर हमीम के जरिए आईएसआई के हैंडलर्स तक पहुंचाती थी।
एसटीएफ के सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल पश्चिम बंगाल और झारखंड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार उत्तर प्रदेश और बिहार में भी फैले होने के संकेत मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब उन सभी संदिग्धों की सूची तैयार कर रही हैं जो इस गिरोह के संपर्क में आए थे या जिनका इस्तेमाल सूचनाएं जुटाने के लिए किया गया था।
पश्चिम बंगाल एसटीएफ के महानिरीक्षक (आईजी) गौरव शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा, दोनों आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से पिछले एक साल से अधिक समय से आतंकी नेटवर्क के संपर्क में बने हुए थे। उनके पास से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संवेदनशील दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनकी तकनीकी जांच की जा रही है। वहीं, मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, यह केवल किसी व्यक्ति की निजी सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ अत्यंत गंभीर मुद्दा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय संबंध और सीमा पार के नेटवर्क शामिल हैं, और जांच एजेंसियां बरामद डेटा के आधार पर हर पहलू की गहनता से पड़ताल कर रही हैं।
