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पुणे में एक करोड़ की लूट के प्रयास में शामिल दो पुलिसकर्मी 12 दिन बाद भी फरार, खाकी ही खाकी को तलाशने में नाकाम

पुणे में सिंहगढ़ रोड पर ब्रह्मा होटल से खेड शिवापुर पुलिस चौकी के बीच एक व्यवसायी से दिनदहाड़े एक करोड़ रुपये लूटने की कोशिश के मामले में राजगढ़ पुलिस थाने के दो निलंबित पुलिसकर्मी वारदात के 12 दिन बीत जाने के बाद भी फरार चल रहे हैं। नन्हे पुलिस थाने की टीम और विशेष जांच दल अपने ही विभाग के इन दो दागी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने में अब तक विफल रहे हैं।

Kalpana Gautam01 अग. 2026, 05:24 PM IST
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पुणे में एक करोड़ की लूट के प्रयास में शामिल दो पुलिसकर्मी 12 दिन बाद भी फरार, खाकी ही खाकी को तलाशने में नाकाम
पुणे में सिंहगढ़ रोड पर ब्रह्मा होटल से खेड शिवापुर पुलिस चौकी के बीच एक व्यवसायी से दिनदहाड़े एक करोड़ रुपये लूटने की कोशिश के मामले में राजगढ़ पुलिस थाने के दो निलंबित पुलिसकर्मी वारदात के 12 दिन बीत जाने के बाद भी फरार चल रहे हैं। नन्हे पुलिस थाने की टीम और विशेष जांच दल अपने ही विभाग के इन दो दागी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने में अब तक विफल रहे हैं।

यह मामला इसलिए गंभीर और चिंताजनक है क्योंकि जनता की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाली पुलिस के ही दो जवान एक बड़े लूटकांड के मुख्य साजिशकर्ता निकले हैं। राजगढ़ पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस नायक अजीज जब्बार मेस्त्री और महिला पुलिस कांस्टेबल प्रमिला शरद निकम की सीधी संलिप्तता सामने आने के बाद कानून-व्यवस्था और पुणे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

18 जुलाई 2026 को तलेगांव दाभाडे निवासी व्यवसायी हर्षवर्धन भूषण पवार अपने सहयोगी किरण आपटे के साथ गाड़ी से एक करोड़ रुपये की नकदी लेकर चौहान एंटरप्राइजेज को देने जा रहे थे। नवले पुल और ब्रह्मा होटल के पास आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उनकी गाड़ी रोकी और आंखों में मिर्च पाउडर फेंककर नकदी छीनने का प्रयास किया। व्यवसायी के साहस और विरोध के कारण डकैती का यह प्रयास मौके पर ही विफल हो गया। इसके बाद खेड शिवापुर पुलिस चौकी में फर्जी पत्रकार आशीष तिवारी और वहां मौजूद राजगढ़ थाने के पुलिसकर्मी अजीज मेस्त्री व प्रमिला निकम ने व्यवसायी पवार को गैरकानूनी धंधे का डर दिखाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और बैग से कुछ रकम गायब कर दी। हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समय पर हस्तक्षेप के बाद रकम वापस कराई गई और सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ।

जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में फर्जी पत्रकार आशीष तिवारी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन निलंबित पुलिसकर्मी अजीज मेस्त्री और प्रमिला निकम समेत कुल छह आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। 12 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों का पकड़े न जाना यह आशंका पैदा कर रहा है कि क्या फरार पुलिसकर्मियों को विभाग के ही किसी अंदरूनी सूत्र से मदद मिल रही है।

पुणे ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कर्तव्य में लापरवाही और आपराधिक साजिश में संलिप्तता पाए जाने के बाद पुलिस कांस्टेबल प्रमिला निकम और पुलिस नायक अजीज मेस्त्री दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
नन्हे पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारियों का कहना है कि फर्जी पत्रकार आशीष तिवारी और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ जारी है और फरार दोनों पुलिसकर्मियों तथा अन्य चार सह-आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें भेजी गई हैं।

 1. घटना की तारीख और स्थान: यह घटना 18 जुलाई 2026 को पुणे के नवले ब्रिज और खेड शिवापुर क्षेत्र के पास घटित हुई थी।
 2. पुलिसकर्मियों की संलिप्तता: राजगढ़ पुलिस थाने के पुलिस नायक अजीज मेस्त्री और महिला कांस्टेबल प्रमिला निकम को साजिश में शामिल पाया गया।
 3. प्रशासनिक कार्रवाई: पुणे ग्रामीण पुलिस ने दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
 4. मौजूदा स्थिति: 12 दिन बीत जाने के बाद भी दोनों पुलिसकर्मी और 4 अन्य साथी (कुल 6 आरोपी) फरार हैं, जबकि फर्जी पत्रकार आशीष तिवारी समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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