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पुणे के बीजे मेडिकल कॉलेज का MBBS छात्र 14 दिन से लापता
महाराष्ट्र के पुणे स्थित प्रतिष्ठित बीजे मेडिकल कॉलेज से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। कॉलेज का प्रथम वर्ष का MBBS छात्र तन्मय वांगे पिछले 14 दिनों से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता है। छात्र के परिवार ने आरोप लगाया है कि कॉलेज में कुछ सीनियर छात्र लगातार उसकी रैगिंग कर रहे थे और ग्रामीण पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। परिजनों का दावा है कि इसी मानसिक दबाव के कारण तन्मय ने हॉस्टल छोड़ दिया। 18 जुलाई को हॉस्टल से निकलने के बाद उसका कोई पता नहीं चल पाया है। पुलिस की जांच में सामने आया कि उसने पुणे रेलवे स्टेशन से सोलापुर जाने वाली ट्रेन पकड़ी थी, लेकिन कुछ समय बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने छह सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जबकि पुलिस भी छात्र की तलाश में जुटी हुई है। इस घटना ने मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की समस्या और छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महाराष्ट्र के पुणे स्थित बीजे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (BJ Medical College) से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मेडिकल शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और रैगिंग की समस्या पर फिर से बहस छेड़ दी है। कॉलेज का प्रथम वर्ष का MBBS छात्र तन्मय वांगे पिछले 14 दिनों से लापता है और अब उसके परिवार ने दावा किया है कि वह कॉलेज में हो रही लगातार रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना का शिकार था। इस मामले के सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन और पुलिस दोनों पर कई सवाल उठ रहे हैं।
तन्मय वांगे के पिता अजयकुमार वांगे ने पुलिस और कॉलेज प्रशासन को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनके बेटे को कॉलेज के कुछ सीनियर छात्र लगातार परेशान कर रहे थे। शिकायत में उत्कर्ष सिंह और श्रेया यादव समेत कुछ छात्रों के नाम भी दर्ज किए गए हैं। परिजनों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद से ही तन्मय को उसकी ग्रामीण पृष्ठभूमि (देहाती बैकग्राउंड) को लेकर बार-बार अपमानित किया जाता था। उसके बोलने के तरीके, रहन-सहन और पारिवारिक पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाया जाता था, जिससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था।
परिवार का आरोप है कि तन्मय ने कई बार अपने साथ हो रही रैगिंग और अपमान की जानकारी दी थी। लगातार हो रही कथित प्रताड़ना के कारण वह तनाव में रहने लगा था। परिजनों का मानना है कि इसी मानसिक दबाव के चलते उसने हॉस्टल छोड़ने का फैसला किया और उसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया। घटनाक्रम के अनुसार, 18 जुलाई को तन्मय ने हॉस्टल प्रशासन को बताया कि वह अपने कुछ रिश्तेदारों से मिलने जा रहा है। इसके बाद वह हॉस्टल से बाहर निकल गया। जांच के दौरान पुलिस ने कॉलेज और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनसे पता चला कि तन्मय पुणे रेलवे स्टेशन पहुंचा और वहां से सोलापुर जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ। इसके बाद लोनी कालभोर रेलवे स्टेशन पार करने के कुछ समय बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यह भी पता चला कि 21 जुलाई और 23 जुलाई को उसके मोबाइल फोन पर कुछ समय के लिए इंटरनेट गतिविधि दर्ज हुई थी। हालांकि, इसके बाद फोन पूरी तरह बंद हो गया और अब तक छात्र का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस मोबाइल की तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उसकी तलाश कर रही है। रैगिंग के आरोप सामने आने के बाद बीजे मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की है। समिति को आरोपों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, तन्मय के पिता का आरोप है कि जांच समिति की रिपोर्ट या उसकी प्रारंभिक निष्कर्षों की जानकारी अब तक परिवार के साथ साझा नहीं की गई है। उनका कहना है कि यदि कॉलेज प्रशासन समय रहते उचित कार्रवाई करता, तो शायद उनका बेटा आज लापता नहीं होता। परिजनों ने यह भी दावा किया है कि कॉलेज में रैगिंग की यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार, कई अन्य छात्रों और अभिभावकों ने भी पहले रैगिंग को लेकर शिकायतें की हैं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
तन्मय के लापता होने का सबसे बड़ा असर उसके परिवार पर पड़ा है। बेटे के अचानक गायब होने से परिवार गहरे सदमे में है। लगातार मानसिक तनाव और चिंता के कारण तन्मय की मां की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का कहना है कि जब तक उनका बेटा सुरक्षित वापस नहीं मिल जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। गौरतलब है कि बीजे मेडिकल कॉलेज पहले भी रैगिंग के मामलों को लेकर विवादों में रह चुका है। पिछले वर्ष कॉलेज में एक रेजीडेंट डॉक्टर के साथ कथित रैगिंग के मामले में तीन रेजीडेंट डॉक्टरों को निलंबित किया गया था। इसके अलावा, सिम्बायोसिस एजुकेशनल ग्रुप के संस्थापक एस. बी. मजूमदार के पोते ने भी इसी कॉलेज में रैगिंग की शिकायत की थी। उस मामले में भी कार्रवाई करते हुए तीन रेजीडेंट डॉक्टरों को निलंबित किया गया था और ऑर्थोपेडिक्स विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. शिरीष बारटक्के का तबादला कर दिया गया था।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजे मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एकनाथ पवार ने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि जांच समिति गठित कर दी गई है और कॉलेज प्रशासन तन्मय के परिजनों के लगातार संपर्क में है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र के लापता होने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और पुलिस के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस और कॉलेज प्रशासन दोनों छात्र की तलाश और रैगिंग के आरोपों की जांच में जुटे हैं। पूरे मामले पर राज्यभर की नजर बनी हुई है। यदि जांच में रैगिंग या किसी प्रकार की लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह घटना एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग रोकने, छात्रों की मानसिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने की आवश्यकता को उजागर करती है।
