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अमित शाह का बड़ा ऐलान, महाराष्ट्र समेत सात राज्यों को मिलेगी इतने करोड़ रुपये की केंद्रीय मदद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मानसून 2026 में बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए SDRF के तहत 2,117.85 करोड़ रुपये की अग्रिम केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा को 500-500 करोड़ रुपये सहित कुल सात राज्यों को राहत राशि जारी की जाएगी। इस धनराशि का उपयोग राहत, बचाव, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन कार्यों में किया जाएगा, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।
Anshuman Mishra01 अग. 2026, 07:21 PM IST

गृह मंत्री अमित शाह ने मानसून 2026 के दौरान बाढ़ से प्रभावित राज्यों के लिए SDRF के तहत 2,117.85 करोड़ रुपये की अग्रिम केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। केंद्र सरकार का कहना है कि राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की वित्तीय कमी न आए, इसके लिए राज्यों को समय से पहले धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें पहले से तैनात की गई हैं और रक्षा मंत्रालय के सहयोग से आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
केंद्र सरकार के अनुसार यह राशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund - SDRF) के केंद्रीय हिस्से से जारी की जा रही है। SDRF वह कोष है जिसका उपयोग राज्य सरकारें बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात, बादल फटना और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए करती हैं। सामान्य परिस्थितियों में राज्यों को यह राशि किस्तों में मिलती है, लेकिन आपात स्थिति में केंद्र सरकार अग्रिम सहायता जारी कर सकती है ताकि राहत कार्यों में किसी तरह की देरी न हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य आपदा के तुरंत बाद प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाइयां, अस्थायी आश्रय, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं तेजी से पहुंचाना है।
इस बार जारी की गई कुल 2,117.85 करोड़ रुपये की सहायता में सबसे अधिक 500-500 करोड़ रुपये महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा को दिए जाएंगे। असम को 379.35 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 193.95 करोड़ रुपये, जबकि अरुणाचल प्रदेश को 44.55 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता मिलेगी। इसके अलावा नागालैंड के अनुरोध पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) का गठन भी किया जा रहा है ताकि वहां हुए नुकसान का आकलन किया जा सके।
सरकार ने बताया कि मानसून के दौरान स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अरुणाचल प्रदेश और असम में नुकसान का आकलन करने के लिए पहले ही अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भेजे जा चुके हैं। असम में बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए दो बार IMCT भेजा गया है। केंद्र का कहना है कि राज्यों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखते हुए जरूरत पड़ने पर NDRF की अतिरिक्त टीमें और संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्राकृतिक आपदा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण होता है कि राहत कार्य समय पर शुरू हो जाएं। यदि राज्यों के पास पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होता, तो बचाव अभियान, राहत शिविर, स्वास्थ्य सेवाएं और पुनर्वास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। अग्रिम वित्तीय सहायता मिलने से राज्य सरकारें तुरंत राहत सामग्री खरीद सकती हैं, प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय उपलब्ध करा सकती हैं, क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत शुरू कर सकती हैं तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं को बहाल कर सकती हैं।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में केवल आपदा आने के बाद राहत देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूर्व तैयारी, समय पर चेतावनी, मजबूत बुनियादी ढांचा और पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी उतने ही आवश्यक हैं। SDRF और NDRF जैसी व्यवस्थाएं इसी उद्देश्य से बनाई गई हैं ताकि राज्यों को तत्काल संसाधन उपलब्ध हो सकें और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
केंद्र सरकार का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मानसून अभी जारी है और आने वाले सप्ताहों में कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। अग्रिम सहायता मिलने से प्रभावित राज्यों को राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने, प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत करने तथा आपदा प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावित राज्यों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने और स्थिति की लगातार निगरानी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
