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पारंपरिक चिकित्सा, वैज्ञानिक शोध और इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर को बढ़ावा, आयुष मंत्रालय ने लोकसभा में दी प्रगति रिपोर्ट
देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने, लोक चिकित्सा ज्ञान का संरक्षण करने और आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुष को एकीकृत करने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार कदम बढ़ा रही है। संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में आयुष मंत्रालय ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयुष मंत्रालय के अधीन विभिन्न संस्थान पारंपरिक उपचार प्रणालियों के दस्तावेजीकरण, वैज्ञानिक परीक्षण, नैदानिक अनुसंधान और एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) देशभर में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित कर रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य सदियों से प्रचलित उपचार पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप परखना और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोगी बनाना है।
लोक चिकित्सा और जनजातीय ज्ञान का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण
मंत्रालय के अनुसार, CCRAS का जनजातीय स्वास्थ्य देखभाल अनुसंधान कार्यक्रम (THCRP) तथा मेडिको एथनो-बॉटैनिकल सर्वेक्षण (MEBS) देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित स्थानीय उपचार परंपराओं और लोक चिकित्सा संबंधी दावों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण कर रहा है। इन कार्यक्रमों के तहत पारंपरिक औषधीय पौधों, घरेलू उपचारों और जनजातीय समुदायों के चिकित्सा ज्ञान को एकत्रित कर उनका वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि उनकी प्रभावशीलता और सुरक्षा का प्रमाण तैयार किया जा सके।
प्रयोगशाला से मरीज तक पहुंच रहा शोध
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में पारंपरिक उपचार विधियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाया जा रहा है। संस्थान नैतिक समिति की स्वीकृति और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद 'बेंच-टू-बेडसाइड' मॉडल के तहत अनुसंधान कर रहा है, जिसमें प्रयोगशाला में विकसित शोध को सीधे मरीजों के उपचार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य आयुर्वेदिक उपचारों के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार करना और उनकी चिकित्सकीय उपयोगिता को मजबूत करना है।
आधुनिक चिकित्सा और आयुष का बढ़ रहा समन्वय
आयुष मंत्रालय ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक चिकित्सा के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए 11 मई 2023 को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और आयुष मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस सहयोग के तहत महिलाओं में एनीमिया के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधि 'पुनर्नवादी मंडुर' की प्रभावशीलता का समुदाय आधारित अध्ययन सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। ऐसे अध्ययन भविष्य में आयुष आधारित उपचारों के वैज्ञानिक मूल्यांकन को और मजबूत करेंगे। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर तथा पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं होम्योपैथी संस्थान (NEIAH), शिलांग जैसे संस्थान भी आधुनिक जांच सुविधाओं जैसे प्रयोगशाला परीक्षण, रेडियोलॉजी और अन्य डायग्नोस्टिक सेवाओं को आयुर्वेदिक उपचार के साथ जोड़कर एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त आयुष मॉडल अस्पताल
मंत्रालय के अनुसार, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली में 200 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक अस्पताल संचालित किया जा रहा है, जहां कार्यशील आईसीयू, आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह अस्पताल आयुर्वेद आधारित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा का मॉडल माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त एम्स झज्जर में एकीकृत कैंसर क्लिनिक तथा सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली में एकीकृत चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां मरीजों को आवश्यकता के अनुसार आधुनिक और आयुष चिकित्सा दोनों का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।
सीजीएचएस लाभार्थियों को दोनों चिकित्सा प्रणालियों का विकल्प
सरकार ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के अंतर्गत लाभार्थियों को एलोपैथिक और आयुष दोनों चिकित्सा प्रणालियों के माध्यम से उपचार की सुविधा उपलब्ध है। मरीज अपनी स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सकीय आवश्यकता और विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के आधार पर उपयुक्त चिकित्सा पद्धति का चयन कर सकते हैं। इससे रोगियों को उपचार के अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा मिलता है।
पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा
आयुष मंत्रालय का कहना है कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक शोध, नैदानिक परीक्षण और आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे के साथ जोड़ने की यह पहल भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय और प्रमाण आधारित स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय का मानना है कि शोध आधारित आयुष चिकित्सा भविष्य में समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का एक मजबूत स्तंभ बन सकती है।
