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दिव्यांग मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी राहत, हर मेडिकल कॉलेज में बनेगी Enabling Unit

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को "Enabling Unit" स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। यह यूनिट दिव्यांग छात्रों को शैक्षणिक सहायता, शिकायत निवारण, सुलभ आधारभूत संरचना और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम करेगी। यह पहल Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के तहत मेडिकल शिक्षा को अधिक समावेशी, समान और दिव्यांग-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Anshuman Mishra01 अग. 2026, 09:30 PM IST
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दिव्यांग मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी राहत, हर मेडिकल कॉलेज में बनेगी Enabling Unit
देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले दिव्यांग (Persons with Disabilities) छात्रों के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी कर अपने संस्थानों में "Enabling Unit" स्थापित करने को कहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल दिव्यांग छात्रों को सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा को अधिक समावेशी, समान और सभी के लिए सुलभ बनाना है।

एनएमसी द्वारा 27 जुलाई 2026 को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि यह निर्णय दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) की भावना और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। यह कानून शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक संस्थानों में दिव्यांगजनों के साथ समान व्यवहार तथा भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की बात करता है। इसी दिशा में मेडिकल कॉलेजों में विशेष "Enabling Unit" स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। 

क्या होगी Enabling Unit?
Enabling Unit मेडिकल कॉलेजों में एक समर्पित सहायता केंद्र के रूप में कार्य करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांग छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों का समाधान उपलब्ध कराना और उन्हें बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने में सहायता देना होगा।

यह यूनिट छात्रों को उचित शैक्षणिक सहायता, आवश्यक सुविधाएं, संस्थान में सुगम पहुंच (Accessibility) और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का कार्य करेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि कॉलेज का वातावरण दिव्यांग छात्रों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसर प्रदान करने वाला हो।

एनएमसी के निर्देशों के अनुसार Enabling Unit की प्रमुख जिम्मेदारियों में दिव्यांग छात्रों को उचित शैक्षणिक एवं क्लिनिकल सहायता उपलब्ध कराना, उनकी शिकायतों का समाधान करना, संस्थान में दिव्यांग-अनुकूल आधारभूत संरचना विकसित करने में सहयोग देना, दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड, फैकल्टी और अस्पताल प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना तथा छात्रों की गोपनीयता और गरिमा बनाए रखना शामिल होगा। यह यूनिट संस्थान की वेबसाइट पर अपनी जानकारी भी सार्वजनिक करेगी ताकि जरूरतमंद छात्र आसानी से संपर्क कर सकें। 

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में लाखों दिव्यांग छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन मेडिकल शिक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में उन्हें अक्सर कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इनमें व्हीलचेयर अनुकूल भवनों की कमी, अध्ययन सामग्री तक सीमित पहुंच, प्रयोगशालाओं और अस्पतालों में पहुंच संबंधी कठिनाइयां, परीक्षा के दौरान आवश्यक सहायता का अभाव तथा मानसिक और सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याएं शामिल हैं।

मेडिकल कॉलेजों में Enabling Unit बनने से इन समस्याओं के समाधान के लिए एक संस्थागत व्यवस्था तैयार होगी। इससे छात्रों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर सहायता मिल सकेगी। साथ ही कॉलेज प्रशासन भी दिव्यांग छात्रों की आवश्यकताओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझ और पूरा कर सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि समावेशी शिक्षा केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य व्यवस्था भी अधिक संवेदनशील बनती है। जब अलग-अलग पृष्ठभूमि और क्षमताओं वाले छात्र डॉक्टर बनते हैं, तो भविष्य की स्वास्थ्य सेवाएं भी अधिक समावेशी और मरीज-केंद्रित बनती हैं।

क्या होंगे इसके लाभ?
इस पहल से दिव्यांग छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। उन्हें समय पर सहायता, उचित शैक्षणिक सहयोग, आवश्यक सुविधाएं और शिकायतों के समाधान के लिए एक औपचारिक तंत्र मिलेगा। इससे पढ़ाई छोड़ने की संभावना कम हो सकती है और अधिक छात्र चिकित्सा शिक्षा पूरी कर सकेंगे।

कॉलेजों में दिव्यांग-अनुकूल आधारभूत संरचना विकसित होने से न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के छात्रों को भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों में दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिससे संस्थानों में भेदभाव कम होगा और समान अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

यह कदम भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को संयुक्त राष्ट्र के दिव्यांगजनों के अधिकार संबंधी कन्वेंशन (UNCRPD), सतत विकास लक्ष्य (SDGs) विशेषकर "सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा" तथा दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एनएमसी का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि मेडिकल शिक्षा में समावेशिता की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है। यदि सभी मेडिकल कॉलेज इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो आने वाले वर्षों में देश के हजारों दिव्यांग मेडिकल छात्रों को बेहतर अवसर, सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मजबूत संस्थागत सहयोग मिल सकेगा।