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महाराष्ट्र में Orchestra Licence पर रोक, होटल और बार कारोबार पर पड़ेगा असर

महाराष्ट्र सरकार ने Orchestra Licence को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए नए लाइसेंस जारी करने और मौजूदा लाइसेंसों के नवीनीकरण पर रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि यह कदम 2016 के डांस बार कानून के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। अब ऑर्केस्ट्रा और लाइव म्यूजिक से जुड़े लाइसेंस नए कानूनी ढांचे के तहत जारी किए जाएंगे, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और बार संचालकों पर सख्त निगरानी रहेगी।

Neha Sharma01 अग. 2026, 09:31 PM IST
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महाराष्ट्र में Orchestra Licence पर रोक, होटल और बार कारोबार पर पड़ेगा असर

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में ऑर्केस्ट्रा (Live Music Performance) लाइसेंस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने निर्देश जारी कर पुलिस को नए ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस जारी करने और मौजूदा लाइसेंसों के नवीनीकरण (Renewal) पर रोक लगाने को कहा है। यह कदम उन मामलों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है, जहां कुछ होटल, रेस्टोरेंट और परमिट रूम ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस का इस्तेमाल कथित तौर पर डांस बार कानून से बचने के लिए कर रहे थे।


सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

राज्य सरकार का कहना है कि Maharashtra Hotels, Restaurants and Bar Rooms (Prohibition of Obscene Dance and Protection of Dignity of Women Working Therein) Act, 2016 लागू होने के बाद डांस बारों पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे। हालांकि, समय के साथ यह सामने आया कि कुछ प्रतिष्ठान ऑर्केस्ट्रा या लाइव म्यूजिक लाइसेंस लेकर उन्हीं गतिविधियों का संचालन कर रहे थे, जिन पर 2016 के कानून के तहत रोक है। इसी "लाइसेंस लूपहोल" (Licensing Loophole) को बंद करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।


क्या बदला है?

  • महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत अब नए Orchestra Licence जारी नहीं किए जाएंगे।
  • पहले से जारी लाइसेंसों का नवीनीकरण भी नहीं होगा।
  • भविष्य में ऑर्केस्ट्रा और लाइव म्यूजिक से जुड़े लाइसेंस 2016 के डांस बार कानून के तहत नियंत्रित किए जाएंगे।
  • इससे होटल, रेस्टोरेंट और बार पर पहले की तुलना में अधिक निगरानी और सख्त नियम लागू होंगे।

विधानसभा में पहले ही हो चुका था कानून में संशोधन

इस फैसले से पहले महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद ने एक संशोधन विधेयक पारित किया था, जिसके तहत ऑर्केस्ट्रा और लाइव म्यूजिक लाइसेंस को भी 2016 के कानून के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया। सरकार का उद्देश्य था कि किसी भी प्रतिष्ठान को ऑर्केस्ट्रा परमिट के जरिए डांस बार कानून से बचने का अवसर न मिले।


सरकार का क्या कहना है?

विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) पंकज भोयर ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकना है। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रतिष्ठान ऑर्केस्ट्रा की अनुमति लेकर अश्लील नृत्य या कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


होटल, रेस्टोरेंट और बार उद्योग पर क्या असर होगा?

इस फैसले का सीधा असर उन होटल, रेस्टोरेंट और परमिट रूम पर पड़ेगा जो लाइव ऑर्केस्ट्रा या म्यूजिक परफॉर्मेंस आयोजित करते हैं।

  • नए कारोबारियों को फिलहाल ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस नहीं मिलेगा।
  • मौजूदा लाइसेंसधारकों को पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं मिलेगा।
  • लाइव म्यूजिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए नए कानूनी ढांचे का पालन करना होगा।
  • नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होने और कानूनी कार्रवाई का जोखिम बढ़ जाएगा।

क्या लाइव म्यूजिक पूरी तरह बंद हो जाएगा?

नहीं। सरकार ने लाइव म्यूजिक या ऑर्केस्ट्रा पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है। बदलाव मुख्य रूप से लाइसेंसिंग प्रक्रिया से जुड़ा है। अब ऐसे कार्यक्रमों को नए कानूनी ढांचे के तहत अनुमति और निगरानी मिलेगी, ताकि ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस का इस्तेमाल डांस बार नियमों से बचने के लिए न किया जा सके।


विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सरकार के लिए कानून के दुरुपयोग को रोकने का प्रयास है। वहीं होटल और मनोरंजन उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि यदि नई व्यवस्था में स्पष्ट दिशानिर्देश और समयबद्ध लाइसेंस प्रक्रिया नहीं होगी, तो वैध लाइव म्यूजिक व्यवसाय भी प्रभावित हो सकता है।


आगे क्या होगा?

सरकार अब नए नियमों के तहत विस्तृत लाइसेंसिंग प्रक्रिया लागू करेगी। होटल, रेस्टोरेंट और बार संचालकों को 2016 के कानून के प्रावधानों के अनुसार आवेदन और अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन को निगरानी तथा प्रवर्तन की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभानी होगी।


महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला राज्य में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस प्रणाली में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे डांस बार कानून के कथित दुरुपयोग पर रोक लगेगी और मनोरंजन उद्योग में अधिक पारदर्शिता आएगी। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नई लाइसेंस व्यवस्था कितनी स्पष्ट, संतुलित और प्रभावी ढंग से लागू की जाती है।