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दिल्ली पालम Fire Tragedy: जांच में बचाव अभियान की कई कमियां उजागर

दिल्ली के पालम अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच में दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की कार्यप्रणाली में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हाइड्रोलिक रेस्क्यू क्रेन में तकनीकी खराबी, संकरी गलियां, अव्यवस्थित बिजली के तार, ज्वलनशील सामग्री और सीमित निकासी मार्गों ने राहत एवं बचाव कार्य को प्रभावित किया। जांच में फायर सेफ्टी व्यवस्था मजबूत करने, आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने और नियमित सुरक्षा ऑडिट की सिफारिश की गई है।

Neha Sharma01 अग. 2026, 09:31 PM IST
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दिल्ली पालम Fire Tragedy: जांच में बचाव अभियान की कई कमियां उजागर

दिल्ली: दिल्ली के पालम इलाके में मार्च 2026 में हुए भीषण अग्निकांड, जिसमें एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई थी, उसकी मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि राहत एवं बचाव अभियान के दौरान तकनीकी खराबी, उपकरणों की कमी, संकरी गलियों, अव्यवस्थित बिजली के तारों और ज्वलनशील सामग्री ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। जांच के बाद फायर सेफ्टी व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।


क्या हुआ था पालम अग्निकांड में?

18 मार्च 2026 की सुबह दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में स्थित चार मंजिला रिहायशी-कम-व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग बेसमेंट में लगी और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत में फैल गई। हादसे में तीन बच्चों समेत नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। स्थानीय लोगों ने खिड़कियां और दीवारें तोड़कर लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग और धुएं की तीव्रता के कारण बचाव अभियान बेहद कठिन हो गया।


1. हाइड्रोलिक क्रेन (Bronto Skylift) में तकनीकी खराबी

जांच रिपोर्ट के अनुसार राहत अभियान के दौरान दिल्ली फायर सर्विस की Bronto Skylift (हाइड्रोलिक रेस्क्यू क्रेन) में तकनीकी समस्या आ गई। ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने वाला यह उपकरण ठीक से काम नहीं कर सका, जिससे बचाव अभियान प्रभावित हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बैकअप हाई-रीच रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध नहीं था।


2. संकरी गलियां और अव्यवस्थित बिजली के तार

रिपोर्ट में बताया गया कि घटनास्थल तक पहुंचने वाला रास्ता संकरा था। ऊपर से बिजली के तार, केबल और बैनर फायर ब्रिगेड की मशीनों के संचालन में बाधा बने। इससे बड़े फायर उपकरणों को इमारत के करीब ले जाना मुश्किल हो गया।


3. भवन में भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री

जांच में पाया गया कि बेसमेंट और अन्य हिस्सों में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री रखी गई थी। इससे आग तेजी से फैली और कुछ ही मिनटों में पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया।


4. केवल एक सीढ़ी होने से बढ़ी मुश्किल

चार मंजिला इमारत में केवल एक संकरी सीढ़ी थी, जो धुएं और आग से जल्दी भर गई। इससे अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया और फायर कर्मियों को भी राहत कार्य में दिक्कत हुई।


5. बचाव कार्य में समन्वय की चुनौती

रिपोर्ट में कहा गया कि मौके पर भीड़, ट्रैफिक और चल रहे सड़क मरम्मत कार्यों ने फायर ब्रिगेड की आवाजाही और राहत कार्य को प्रभावित किया। इससे समय पर उपकरणों की तैनाती में भी कठिनाई आई।


जांच रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए?

  • फायर ब्रिगेड के हाई-रीच उपकरणों की नियमित जांच और रखरखाव।
  • हर महत्वपूर्ण उपकरण के लिए बैकअप व्यवस्था।
  • संकरी बस्तियों और बाजार क्षेत्रों का विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट।
  • अवैध बिजली के तारों और अतिक्रमण को हटाना।
  • ज्वलनशील सामग्री के भंडारण पर कड़ी निगरानी।
  • बहुमंजिला इमारतों में एक से अधिक आपातकालीन निकासी मार्ग सुनिश्चित करना।
  • नियमित फायर ड्रिल और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना के बाद दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए और पूरे शहर में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का फैसला लिया। दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या विभाग की लापरवाही सामने आती है तो "दोषियों के खिलाफ उदाहरणात्मक (Exemplary) कार्रवाई की जाएगी।"

इसी बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। आयोग ने मीडिया रिपोर्टों में सामने आए इस दावे पर भी ध्यान दिया कि हाइड्रोलिक क्रेन में तकनीकी खराबी के कारण बचाव कार्य प्रभावित हुआ।


क्या आग लगने का कारण स्पष्ट हो गया?

दिल्ली पुलिस को सौंपी गई इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर की रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आग के सटीक कारण का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। यानी आग की वास्तविक वजह को लेकर जांच निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।


भविष्य के लिए सबक

पालम अग्निकांड ने स्पष्ट कर दिया कि केवल फायर ब्रिगेड की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। आधुनिक उपकरण, उनका नियमित रखरखाव, प्रशिक्षित कर्मी, भवनों में फायर सेफ्टी मानकों का पालन और संकरी बस्तियों में बेहतर शहरी नियोजन भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच रिपोर्ट की सिफारिशों को गंभीरता से लागू किया गया, तो भविष्य में ऐसी त्रासदियों की संभावना कम की जा सकती है।