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दिल्ली में ‘Property Aadhaar’ की तैयारी: हर संपत्ति को मिलेगी अलग डिजिटल पहचान
दिल्ली सरकार ‘Property Aadhaar’ के जरिए हर संपत्ति को अलग डिजिटल पहचान देने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित Land Records Bill, 2026 के तहत संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वे कर रिकॉर्ड को डिजिटल बनाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने और जमीन विवाद कम करने में मदद मिल सकती है।
Neha Sharma01 अग. 2026, 09:31 PM IST

दिल्ली: दिल्ली सरकार राजधानी की जमीन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 के तहत शहर की हर संपत्ति का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा और उसे एक अलग डिजिटल पहचान दी जाएगी। सरकार इस व्यवस्था को ‘Property Aadhaar Card’ के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
दिल्ली में जल्द ही जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान और अन्य संपत्तियों के रिकॉर्ड को एक आधुनिक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के तहत राजधानी की सभी संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा और प्रत्येक संपत्ति का प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
सरकार की योजना हर संपत्ति को एक अलग और सुरक्षित डिजिटल पहचान देने की है, जिसे ‘Property Aadhaar Card’ कहा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जमीन और संपत्ति के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाना, स्वामित्व से जुड़े भ्रम को कम करना और भूमि विवादों पर नियंत्रण करना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या कहा?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस प्रस्तावित व्यवस्था को संपत्ति रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह आधार कार्ड ने प्रत्येक नागरिक को एक विश्वसनीय पहचान दी है, उसी तरह दिल्ली की हर संपत्ति को अब एक सुरक्षित और प्रमाणित डिजिटल पहचान देने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य संपत्ति रिकॉर्ड को अधिक स्पष्ट, प्रमाणिक और आसानी से सत्यापित करने योग्य बनाना है। इसके लिए पूरे दिल्ली क्षेत्र में जमीन और संपत्तियों का व्यापक सर्वे कराया जाएगा।
क्या है ‘Property Aadhaar’?
‘Property Aadhaar’ किसी व्यक्ति के आधार कार्ड की तरह बायोमेट्रिक पहचान नहीं होगा। यह प्रस्तावित रूप से किसी जमीन, मकान, फ्लैट, दुकान या अन्य संपत्ति को दी जाने वाली अलग डिजिटल पहचान होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने की योजना है। इसमें संपत्ति की स्थिति, सीमाएं, सर्वे से जुड़ी जानकारी और अन्य प्रमाणित भूमि रिकॉर्ड शामिल किए जा सकते हैं
सरकार का उद्देश्य अलग-अलग विभागों में बिखरे संपत्ति रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है, ताकि किसी संपत्ति की पहचान और रिकॉर्ड का सत्यापन आसान हो सके।
दिल्ली की हर संपत्ति का होगा वैज्ञानिक सर्वे
प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद दिल्ली की संपत्तियों का व्यापक वैज्ञानिक सर्वे कराया जाएगा। यह सर्वे केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी क्षेत्रों की आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणियों की संपत्तियों को भी इसमें शामिल करने की योजना है।
सर्वे के बाद हर संपत्ति का एक विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर संपत्ति को अलग डिजिटल पहचान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस पहल से सरकार को राजधानी में जमीन और संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का अधिक सटीक रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिल सकती है।
30 ग्रामीण गांवों के पायलट से मिली दिशा
दिल्ली सरकार ने इससे पहले केंद्र सरकार की SVAMITVA योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार करने का काम किया है। इस पायलट परियोजना में ड्रोन सर्वे और भारतीय सर्वेक्षण विभाग की तकनीकी सहायता का उपयोग किया गया। सरकार अब इसी अनुभव के आधार पर दिल्ली के बड़े हिस्से में आधुनिक डिजिटल भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था विकसित करने की तैयारी कर रही है।
जमीन और संपत्ति विवादों में कैसे मिलेगी मदद?
दिल्ली में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों के पीछे कई बार रिकॉर्ड की अस्पष्टता, सीमाओं को लेकर मतभेद, अलग-अलग विभागों में मौजूद जानकारी और स्वामित्व से जुड़े विवाद बड़ी वजह बनते हैं।
यदि संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वे कर प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, तो किसी संपत्ति की पहचान और उससे जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन आसान हो सकता है।
- संपत्ति की पहचान अधिक स्पष्ट हो सकती है।
- जमीन की सीमा से जुड़े विवाद कम हो सकते हैं।
- रिकॉर्ड के सत्यापन में आसानी हो सकती है।
- संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
- खरीद-बिक्री और अन्य संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
- फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन लाभों का वास्तविक प्रभाव कानून के लागू होने, सर्वे की गुणवत्ता और अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड को सही तरीके से जोड़ने पर निर्भर करेगा।
दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 की तैयारी
दिल्ली सरकार प्रस्तावित दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 को जल्द कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रख सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक को विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना कम है। सरकार इसे बाद में विशेष सत्र बुलाकर पारित कराने की तैयारी कर सकती है। हालांकि, विधेयक की अंतिम समय-सीमा और प्रक्रिया सरकार की औपचारिक मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।
बहुमंजिला इमारतों और शहरी संपत्तियों को भी शामिल करने की योजना
प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था केवल जमीन के बड़े टुकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें दिल्ली के शहरी क्षेत्रों की आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों को भी शामिल करने की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, बहुमंजिला इमारतों में अलग-अलग संपत्तियों और मंजिलों के लिए भी अलग पहचान की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इससे फ्लैट, दुकान और अन्य यूनिट से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिल सकती है।
‘Property Aadhaar’ और ‘Bhu-Aadhaar’ में क्या अंतर है?
दिल्ली में इससे पहले Bhu-Aadhaar या यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर से जुड़ी पहल पर भी काम शुरू किया गया था। Bhu-Aadhaar का उद्देश्य जमीन के प्रत्येक भूखंड को उसकी भौगोलिक स्थिति और सर्वे रिकॉर्ड के आधार पर अलग पहचान देना है। केंद्र सरकार के भूमि संसाधन विभाग के अनुसार, ULPIN एक 14 अंकों की पहचान संख्या है, जो भूखंड की लोकेशन और जियो-रेफरेंस्ड कैडस्ट्रल मैप के आधार पर तैयार की जाती है।
वहीं, प्रस्तावित ‘Property Aadhaar’ व्यवस्था का दायरा व्यापक हो सकता है, क्योंकि इसमें जमीन के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों की आवासीय, व्यावसायिक और अन्य संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड को भी शामिल करने की योजना है।
लोगों को क्या फायदा हो सकता है?
यदि प्रस्तावित कानून लागू होता है और डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था सही तरीके से विकसित होती है, तो आम संपत्ति मालिकों को कई स्तरों पर सुविधा मिल सकती है। किसी संपत्ति के रिकॉर्ड की पहचान और सत्यापन आसान हो सकता है। इससे संपत्ति खरीदने वाले लोगों को दस्तावेजों की जांच में मदद मिल सकती है। बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए भी संपत्ति रिकॉर्ड का सत्यापन अधिक व्यवस्थित हो सकता है।
इसके अलावा, सरकार के लिए शहरी नियोजन, संपत्ति प्रबंधन और भूमि से जुड़े प्रशासनिक कामों में बेहतर जानकारी उपलब्ध हो सकती है। हालांकि, सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति की कानूनी मिल्कियत के बीच संबंध क्या होगा। केवल डिजिटल पहचान मिलने से किसी संपत्ति का स्वामित्व अपने आप तय नहीं होगा। स्वामित्व से जुड़े कानूनी अधिकार संबंधित कानूनों और दस्तावेजों के आधार पर ही तय होंगे।
सरकार के सामने क्या चुनौतियां होंगी?
दिल्ली में जमीन और संपत्ति के रिकॉर्ड कई विभागों और एजेंसियों से जुड़े हैं। ऐसे में सभी रिकॉर्ड को एक साझा और प्रमाणित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना बड़ी प्रशासनिक चुनौती हो सकती है।
- वैज्ञानिक सर्वे में संपत्तियों की सही सीमाएं दर्ज हों।
- पुराने और नए रिकॉर्ड के बीच अंतर को स्पष्ट किया जाए।
- अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड का सही समन्वय हो।
- संपत्ति मालिकों को रिकॉर्ड में सुधार या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिले।
- डिजिटल डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जाए।
- विवादित संपत्तियों के रिकॉर्ड को स्पष्ट तरीके से अलग दर्ज किया जाए।
दिल्ली में ‘Property Aadhaar’ की तैयारी राजधानी के भूमि और संपत्ति रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य हर संपत्ति को एक प्रमाणित डिजिटल पहचान देकर रिकॉर्ड की अस्पष्टता कम करना और जमीन विवादों को घटाना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, जिस तरह आधार कार्ड ने नागरिकों को एक विश्वसनीय पहचान दी है, उसी तरह संपत्तियों को भी सुरक्षित और प्रमाणित डिजिटल पहचान देने की तैयारी की जा रही है।
हालांकि, यह योजना अभी प्रस्तावित चरण में है। दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 के कैबिनेट और विधानसभा से मंजूरी मिलने तथा वैज्ञानिक सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही इसके अंतिम स्वरूप और लागू होने की समय-सीमा स्पष्ट होगी।
