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PMSMA की बड़ी उपलब्धि: 7.91 करोड़ गर्भवती महिलाओं को मिला सुरक्षित मातृत्व का सहारा
देश में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहा है। केंद्र सरकार ने बताया है कि वर्ष 2016 में शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 7.91 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल (Antenatal Care-ANC) सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि 1.24 करोड़ से अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (High Risk Pregnancy-HRP) की समय रहते पहचान कर उन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल प्रदान की गई है।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने न केवल गर्भवती महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई हैं, बल्कि मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मातृ मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट
सरकार के अनुसार, भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio-MMR) वर्ष 2014-16 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 130 था, जो वर्ष 2022-24 में घटकर 87 रह गया है। यानी आठ वर्षों में मातृ मृत्यु दर में 43 अंकों की कमी दर्ज की गई है। यह सुधार संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, संस्थागत प्रसव और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता ने इस उपलब्धि में अहम योगदान दिया है।
गर्भावस्था की शुरुआती जांच में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रसवपूर्व पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-4) के 58.6 प्रतिशत से बढ़कर NFHS-6 में 76.2 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार, कम से कम चार प्रसवपूर्व जांच (ANC Visits) कराने वाली महिलाओं की संख्या भी 51.2 प्रतिशत से बढ़कर 65.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। नियमित जांच के कारण गर्भावस्था के दौरान एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कुपोषण तथा अन्य जटिलताओं की समय पर पहचान संभव हो रही है।
अस्पतालों में प्रसव की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का प्रभाव संस्थागत प्रसव पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अस्पतालों या स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव का प्रतिशत NFHS-4 के 78.9 प्रतिशत से बढ़कर NFHS-6 में 90.6 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, संस्थागत प्रसव से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं का तुरंत उपचार संभव होता है, जिससे मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी आती है।
हर महीने की 9 तारीख को मिलती हैं मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी "निश्चित तिथि सेवा" (Fixed Day Service) है। प्रत्येक महीने की 9 तारीख को देशभर के नामित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सभी गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क प्रसवपूर्व जांच उपलब्ध कराई जाती है। इस दौरान विशेषज्ञ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी तथा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। उन्हें आवश्यक लैब जांच, अल्ट्रासाउंड, रक्त परीक्षण, मुफ्त दवाएं, आयरन एवं फोलिक एसिड की गोलियां तथा पोषण, स्तनपान और सुरक्षित गर्भावस्था से जुड़ी सलाह भी दी जाती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति या भौगोलिक दूरी किसी भी महिला के लिए गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा न बने।
हाई-रिस्क गर्भावस्थाओं की डिजिटल निगरानी
अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए विस्तारित ई-पीएमएसएमए (e-PMSMA) प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिला और नवजात शिशु की प्रसव के बाद 45 दिनों तक नाम-आधारित डिजिटल ट्रैकिंग की जाती है। इसके अलावा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए तीन अतिरिक्त प्रसवपूर्व जांच, नियमित फॉलो-अप, आशा कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों को एसएमएस रिमाइंडर तथा आवश्यकता पड़ने पर मुफ्त परिवहन या प्रोत्साहन राशि की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी के कारण जोखिम वाले मामलों में समय पर रेफरल और उपचार सुनिश्चित हो पा रहा है।
निजी डॉक्टरों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर
केंद्र सरकार ने अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए निजी क्षेत्र के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त चिकित्सकों को भी इससे जोड़ा है। उन्हें प्रत्येक महीने की 9 तारीख को स्वैच्छिक सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए "आई प्लेज फॉर 9" (I Pledge for 9) पहल शुरू की गई है, जिसके तहत उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया जाता है। साथ ही केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से डॉक्टरों का पंजीकरण आसान बनाया गया है और फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) जैसे पेशेवर संगठनों का सहयोग लिया जा रहा है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में बड़ा कदम
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का उद्देश्य केवल गर्भावस्था के दौरान जांच कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव, स्वस्थ नवजात और प्रसवोत्तर देखभाल उपलब्ध कराना है। समय पर जांच, डिजिटल निगरानी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और निजी क्षेत्र की भागीदारी जैसे कदमों से भारत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में मातृ मृत्यु दर को और कम करना, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की शीघ्र पहचान करना तथा देश की प्रत्येक गर्भवती महिला तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
