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प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना: अब आर्थिक तंगी नहीं रोकेगी उच्च शिक्षा का सपना, बिना गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन
प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। योजना के तहत 1,425 चयनित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को बिना गारंटी और बिना कोलेटरल शिक्षा ऋण मिलेगा। पात्र छात्रों को 3% ब्याज सब्सिडी, डिजिटल आवेदन प्रक्रिया और आसान ऋण सुविधा का लाभ दिया जाएगा, जिससे आर्थिक तंगी के कारण किसी छात्र की पढ़ाई बाधित न हो।
Anshuman Mishra01 अग. 2026, 09:31 PM IST

देश में उच्च शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। इस योजना का उद्देश्य उन मेधावी छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद आर्थिक कठिनाइयों के कारण IIT, IIM, AIIMS, NIT, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई का सपना पूरा नहीं कर पाते। यह योजना छात्रों को बिना किसी संपत्ति की गारंटी (Collateral) और बिना किसी गारंटर के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर खुलते हैं।
भारत में पिछले एक दशक के दौरान उच्च शिक्षा में नामांकन (Gross Enrolment Ratio) लगातार बढ़ा है। वर्ष 2014-15 में जहां यह 23.7 प्रतिशत था, वहीं 2023-24 में बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गया। हालांकि, लाखों योग्य छात्र आज भी आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर 2024 में प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की आर्थिक स्थिति उसकी प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने।
योजना के तहत देश के 1,425 गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षण संस्थानों (QHEIs) को शामिल किया गया है। इनमें NIRF रैंकिंग में शामिल शीर्ष संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान तथा कई प्रतिष्ठित सरकारी एवं निजी संस्थान शामिल हैं। हालांकि, मैनेजमेंट कोटा या NRI कोटा के माध्यम से प्रवेश लेने वाले छात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्रों को बिना किसी संपत्ति गिरवी रखे और बिना तीसरे पक्ष की गारंटी के शिक्षा ऋण मिल सकता है। ऋण की अधिकतम राशि पर कोई निश्चित सीमा नहीं रखी गई है। यह संबंधित संस्थान की फीस, हॉस्टल, मेस, लैपटॉप, रहने के खर्च और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के आधार पर तय की जाती है। इसके अलावा सरकार 7.5 लाख रुपये तक के ऋण पर बैंकों को 75 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी देती है, जिससे बैंक भी अधिक छात्रों को आसानी से ऋण देने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ब्याज सब्सिडी भी है। जिन छात्रों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक है, उन्हें 10 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर पढ़ाई की अवधि और उसके बाद एक वर्ष के मोरेटोरियम तक 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है। वहीं, जिन परिवारों की वार्षिक आय 4.5 लाख रुपये तक है, वे पहले से लागू PM-USP CSIS योजना के तहत पूर्ण ब्याज सब्सिडी का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों पर पढ़ाई पूरी होने के बाद ऋण चुकाने का बोझ काफी कम हो जाता है।
योजना के तहत शिक्षा ऋण की ब्याज दर भी सामान्य शिक्षा ऋण की तुलना में कम रखी गई है। बैंक केवल अपनी Externally Benchmarked Lending Rate (EBLR) में अधिकतम 0.5 प्रतिशत जोड़कर ब्याज वसूल सकते हैं। यदि छात्र पढ़ाई के दौरान ही ब्याज का भुगतान करते हैं, तो कुछ बैंक अतिरिक्त रियायत भी प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा 80E के तहत शिक्षा ऋण पर दिए गए ब्याज पर कर लाभ भी मिलता है।
प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित है। छात्र एकीकृत पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, विभिन्न बैंकों का चयन कर सकते हैं, आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं, ब्याज सब्सिडी का दावा कर सकते हैं और शिकायतों का समाधान भी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। सब्सिडी की राशि डिजिटल रुपया (CBDC) वॉलेट के माध्यम से सीधे शिक्षा ऋण खाते में भेजी जाती है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज बनती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में पोर्टल पर सभी शिक्षा ऋण योजनाओं के तहत 6.45 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 1.10 लाख से अधिक आवेदन केवल प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के लिए थे। इनमें से लगभग 70,852 ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं और 67,728 से अधिक छात्रों को राशि भी वितरित की जा चुकी है। इसी अवधि में CSIS योजना के अंतर्गत हजारों छात्रों को ब्याज सब्सिडी का लाभ डिजिटल माध्यम से पहुंचाया गया, जिससे शिक्षा ऋण वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी बनी है।
यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा देती है। महिला, ट्रांसजेंडर, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांग छात्रों सहित सभी पात्र वर्गों को समान अवसर देने का प्रयास किया गया है। सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा तक समान पहुंच रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक समानता को मजबूत करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे युवा देश में उच्च शिक्षा की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बिना गारंटी शिक्षा ऋण और ब्याज सहायता जैसी योजनाएं लाखों परिवारों के लिए राहत बन सकती हैं। इससे प्रतिभाशाली छात्र केवल आर्थिक अभाव के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होंगे। इसके साथ ही देश को अधिक प्रशिक्षित, कुशल और प्रतिस्पर्धी मानव संसाधन मिलेगा, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था और नवाचार आधारित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य को भी मजबूत करती है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को सभी के लिए सुलभ और समावेशी बनाने की बात कही गई है। साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-4) यानी "सभी के लिए समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा" की दिशा में भारत के प्रयासों को भी गति देती है। यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में लाखों छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुलभ हो सकता है।
