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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का ओडिशा दौरा: पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के विकास पर रहेगा विशेष फोकस, असम के मौजूदा परिदृश्य में बढ़ी अहमियत
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 3 से 5 अगस्त, 2026 तक तीन दिवसीय ओडिशा दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन करेंगी और गंजाम जिले के तप्तपानी स्थित मां कंधुनी देवी मंदिर तथा शिव मंदिर में दर्शन एवं आरती में शामिल होंगी।
Anshuman Mishra02 अग. 2026, 09:00 PM IST

राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा, जनजातीय विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता को लेकर कई महत्वपूर्ण पहलें जारी हैं।
3 अगस्त को कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन उच्च शिक्षा, शोध और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अगले दिन राष्ट्रपति विशेष रेल यात्रा से भुवनेश्वर से बरहमपुर पहुंचेंगी और तप्तपानी स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना करेंगी। यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के संदेश को भी मजबूत करता है।
असम के मौजूदा हालात के संदर्भ में क्यों अहम है यह दौरा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल में जनजातीय समाज, शिक्षा और समावेशी विकास को लगातार प्राथमिकता दी है। ऐसे समय में जब असम में जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, शिक्षा के विस्तार और सामाजिक सौहार्द जैसे विषय प्रमुखता से चर्चा में हैं, राष्ट्रपति का यह दौरा व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
असम और ओडिशा दोनों राज्यों में बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है। दोनों राज्यों के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण जैसी कई समान चुनौतियां हैं। ऐसे में ओडिशा में उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक माने जा रहे हैं।
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़क, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया है। इसी क्रम में असम देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। राष्ट्रपति का ओडिशा दौरा इस व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास, शिक्षा के विस्तार और सांस्कृतिक पहचान को समान महत्व दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा और असम जैसे राज्यों के बीच जनजातीय कल्याण, शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण के सफल मॉडल साझा किए जा सकते हैं। इससे न केवल स्थानीय समुदायों को लाभ मिलेगा बल्कि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के संतुलित विकास को भी गति मिलेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि विकसित भारत के लक्ष्य में शिक्षा, जनजातीय सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय संतुलित विकास को समान प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में ओडिशा की यह यात्रा असम सहित पूरे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के विकास के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।
