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भारत की सौर क्रांति का नया अध्याय: प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना से 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित होगी

भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी देकर देश में फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage System-ESS) के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं का विकास किया जाएगा।

Anshuman Mishra02 अग. 2026, 09:01 PM IST
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भारत की सौर क्रांति का नया अध्याय: प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना से 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित होगी

 सरकार का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा महाशक्ति के रूप में स्थापित करना है। यह योजना ऐसे समय में आई है जब भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में शामिल है। पिछले एक दशक में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत नीतियां, निवेश और तकनीकी नवाचार मिलकर ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

एक दशक में 50 गुना से अधिक बढ़ी सौर क्षमता
साल 2014 में भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 3 गीगावाट थी। उस समय देश के ऊर्जा मिश्रण में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बेहद सीमित थी। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय सौर मिशन, सोलर पार्क योजना, पीएम-कुसुम, रूफटॉप सोलर कार्यक्रम और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं के जरिए लगातार प्रोत्साहन दिए जाने के परिणामस्वरूप सौर ऊर्जा क्षेत्र ने रिकॉर्ड गति से विकास किया।

30 जून 2026 तक भारत की स्थापित सौर क्षमता बढ़कर 162.15 गीगावाट पहुंच गई है। यानी महज 12 वर्षों में सौर क्षमता में 50 गुना से अधिक का विस्तार हुआ है। आज सौर ऊर्जा भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा स्रोत बन चुकी है और देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

क्या है प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना?
31 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) का उद्देश्य देशभर के जलाशयों, बांधों, सिंचाई परियोजनाओं तथा औद्योगिक जल निकायों पर फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं का विकास करना है।

इस योजना के तहत कुल 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित की जाएगी। इसके साथ न्यूनतम दो घंटे की ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS) भी अनिवार्य रूप से जोड़ी जाएगी, जिससे लगभग 10,000 मेगावाट-घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता उपलब्ध होगी। यह परियोजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। योजना के लिए केंद्र सरकार ने 5,070 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।

फ्लोटिंग सोलर क्यों है भविष्य की तकनीक?
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं पारंपरिक सौर संयंत्रों की तुलना में कई दृष्टियों से अधिक उपयोगी मानी जाती हैं। इनमें सोलर पैनलों को झीलों, जलाशयों, सिंचाई बांधों या औद्योगिक जल निकायों की सतह पर विशेष फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जाता है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होती। इससे कृषि भूमि सुरक्षित रहती है और बड़े जलाशयों का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है। पानी की सतह पर लगे सोलर पैनल अपेक्षाकृत ठंडे रहते हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ जाती है। इसके अलावा जलाशयों से पानी का वाष्पीकरण कम होता है और बिजली उत्पादन अधिक स्थिर रहता है।

ऊर्जा भंडारण से मिलेगा बड़ा फायदा
अब तक सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि बिजली केवल दिन के समय उत्पन्न होती है। शाम और रात के समय बिजली की मांग बढ़ने पर सौर संयंत्र सीधे बिजली उपलब्ध नहीं करा पाते।

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना में इस समस्या का समाधान ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS) के माध्यम से किया गया है। दिन में अतिरिक्त उत्पादित बिजली बैटरियों में संग्रहित होगी और शाम के समय अथवा बिजली की चरम मांग के दौरान ग्रिड को उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी तथा राज्यों को महंगे पारंपरिक बिजली स्रोतों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान का आकलन
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन के अनुसार भारत के जलाशयों और अन्य उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में लगभग 102.18 गीगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित की जा सकती है।

वर्तमान में देश की फ्लोटिंग सोलर क्षमता लगभग 700 मेगावाट है। प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के माध्यम से इसे बढ़ाकर 5,000 मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह भारत के फ्लोटिंग सोलर क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विस्तार होगा।

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में मिलेगी मजबूती
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सरकार का अनुमान है कि प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के लागू होने के बाद प्रतिवर्ष लगभग 10 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे भारत अपने अंतरराष्ट्रीय जलवायु दायित्वों को पूरा करने की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सकेगा।

रोजगार और उद्योग दोनों को मिलेगा लाभ
यह योजना केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे व्यापक आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। सरकारी अनुमान के अनुसार योजना के माध्यम से लगभग 16,000 से 17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार सृजित होंगे।

इसके अतिरिक्त फ्लोटेशन सिस्टम, सोलर पीवी सेल, सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, विद्युत उपकरण तथा इंजीनियरिंग एवं निर्माण सेवाओं के घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" अभियान को नई मजबूती मिलेगी।

राज्यों को कैसे मिलेगा फायदा?
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना का लाभ देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेगा। जिन राज्यों में बड़े जलाशय, सिंचाई परियोजनाएं और औद्योगिक जल निकाय हैं, वहां फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं तेजी से विकसित की जा सकेंगी।

विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस योजना की व्यापक संभावनाएं हैं। इन परियोजनाओं से राज्यों को अतिरिक्त स्वच्छ बिजली मिलेगी, बिजली खरीद लागत कम होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
भारत लगातार बढ़ती बिजली मांग और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। फ्लोटिंग सोलर और ऊर्जा भंडारण का यह मॉडल भविष्य की ऊर्जा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे हाइब्रिड ऊर्जा संयंत्र देश की बिजली व्यवस्था को अधिक स्थिर, सुरक्षित और टिकाऊ बनाएंगे। इससे बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव भी कम होगा और उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

भारत की वैश्विक स्थिति होगी और मजबूत
आज भारत दुनिया के अग्रणी सौर ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की अगुवाई करने वाला भारत अब फ्लोटिंग सोलर और ऊर्जा भंडारण जैसी उन्नत तकनीकों में भी नेतृत्व स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना केवल एक नई सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निवेश है। यदि निर्धारित समयसीमा में इसका सफल क्रियान्वयन होता है तो यह योजना आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव का आधार बन सकती है।