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प्रश्नपत्र लीक के दावों से रहें सावधान: NEET-PG 2026 को लेकर स्वास्थ्य मंत्री की बड़ी चेतावनी

देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातकोत्तर (NEET-PG) 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को परीक्षा की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि 30 अगस्त को होने वाली परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित, निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम तरीके से आयोजित की जाए।

Anshuman Mishra02 अग. 2026, 09:01 PM IST
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प्रश्नपत्र लीक के दावों से रहें सावधान: NEET-PG 2026 को लेकर स्वास्थ्य मंत्री की बड़ी चेतावनी
 उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को बिना किसी परेशानी के परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए और परीक्षा की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS), तकनीकी साझेदारों और परीक्षा आयोजन से जुड़े विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में परीक्षा केंद्रों की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था, उम्मीदवारों की सुविधा, तकनीकी प्रणालियों और प्रश्नपत्र की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए उपायों की विस्तार से समीक्षा की गई।

इस वर्ष NEET-PG के लिए कुल 2,73,183 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.5 प्रतिशत से अधिक वृद्धि को दर्शाता है। परीक्षा देशभर के लगभग 340 शहरों में 1,300 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर केवल एक शिफ्ट में आयोजित होगी। सरकार का कहना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक समान, निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी, वहीं अधिक शहरों में परीक्षा केंद्र उपलब्ध होने से उम्मीदवारों की यात्रा संबंधी परेशानियां भी कम होंगी।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने परीक्षा को लेकर फैलने वाली अफवाहों और फर्जी दावों से सावधान रहने की अपील भी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र का अंतिम चयन परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले अत्यधिक सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत किया जाता है। कई स्तरों की तकनीकी और परिचालन सुरक्षा व्यवस्था के कारण निर्धारित समय से पहले किसी भी व्यक्ति के लिए प्रश्नपत्र तक पहुंच संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक या पहले से उपलब्ध होने का दावा पूरी तरह भ्रामक है और इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को गुमराह करना है। उन्होंने छात्रों से केवल राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की। साथ ही यदि किसी को परीक्षा में धांधली, दलाली या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो उसकी तुरंत सूचना संबंधित अधिकारियों को देने को कहा।

इस बार परीक्षा प्रक्रिया को अभ्यर्थी-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उम्मीदवारों को आवेदन के दौरान परीक्षा केंद्र के लिए तीन राज्यों की प्राथमिकता देने का विकल्प दिया गया है, जिसमें उनके पत्राचार वाले राज्य को पहली अनिवार्य प्राथमिकता बनाया गया है। इससे अधिकांश उम्मीदवारों को उनके निवास स्थान के निकट परीक्षा केंद्र मिलने की संभावना बढ़ेगी।

इसके अलावा, अभ्यर्थियों को परीक्षा से लगभग तीन सप्ताह पहले ही उनके परीक्षा शहर की जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी ताकि वे समय रहते यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर सकें। इससे अंतिम समय में होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम करने की कोशिश की गई है।

परीक्षा पैटर्न में भी बदलाव किया गया है। अब उम्मीदवारों को 210 मिनट में 180 प्रश्न हल करने होंगे। इससे प्रत्येक प्रश्न के लिए पहले की तुलना में अधिक समय मिलेगा, जिससे परीक्षार्थियों पर समय का दबाव कुछ कम होगा।

पहचान सत्यापन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आवेदन प्रक्रिया तथा परीक्षा के दिन आधार आधारित प्रमाणीकरण लागू किया गया है। यदि किसी उम्मीदवार का फिंगरप्रिंट सत्यापन सफल नहीं होता है, तो उसकी पहचान आइरिस बायोमेट्रिक के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी।

परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को बहुस्तरीय बनाया गया है। सभी परीक्षा केंद्रों की अग्रिम सीलिंग और सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, अभ्यर्थियों की फ्रिस्किंग, सिग्नल जैमर की तैनाती, कंप्यूटर सिस्टम की रियल टाइम मॉनिटरिंग, केंद्रीय एवं क्षेत्रीय कमांड सेंटर से लाइव निगरानी तथा स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति जैसे व्यापक सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। परीक्षा के सफल संचालन के लिए देशभर में 60,000 से अधिक परीक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार प्रश्नपत्र की तैयारी से लेकर परीक्षा केंद्र तक उसकी सुरक्षित डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है। इसमें बहुस्तरीय एन्क्रिप्शन, सुरक्षित ऑफलाइन तैयारी, परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले अंतिम प्रश्नपत्र का चयन तथा निर्धारित समय पर ही नियंत्रित डिजिटल डिक्रिप्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

पारदर्शिता बढ़ाने और नकल या अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए NBEMS ने प्रतिरूपण, दलालों की गतिविधियों और अन्य परीक्षा संबंधी शिकायतों के लिए एक समर्पित ईमेल आईडी भी शुरू की है। इसके माध्यम से अभ्यर्थी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना सीधे बोर्ड को दे सकेंगे। साथ ही समय-समय पर आधिकारिक परामर्श जारी कर छात्रों को जागरूक भी किया जा रहा है।

बैठक के अंत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय बनाए रखते हुए परीक्षा के प्रत्येक चरण की निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने दोहराया कि सरकार मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं को सर्वोच्च स्तर की पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीकी मजबूती के साथ आयोजित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि हर उम्मीदवार को समान और सुरक्षित अवसर मिल सके।