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सर्वाइकल कैंसर खत्म करने की दिशा में भारत की बड़ी पहल, 8.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग और 1.2 करोड़ किशोरियों के HPV टीकाकरण का लक्ष्य

भारत ने सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में समाप्त करने की दिशा में अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के साथ वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दों पर आयोजित वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रहा है।

Vindhya Dubey02 अग. 2026, 09:01 PM IST
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सर्वाइकल कैंसर खत्म करने की दिशा में भारत की बड़ी पहल, 8.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग और 1.2 करोड़ किशोरियों के HPV टीकाकरण का लक्ष्य
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से निपटने के लिए भारत ने बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है, जिसमें बीमारी की रोकथाम, नियमित स्क्रीनिंग, शुरुआती चरण में पहचान और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना शामिल है। उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान से इस बीमारी को नियंत्रित करने और मृत्यु दर को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि देश में 30 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर की जांच सुविधाओं का विस्तार किया गया है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों सहित विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर विजुअल इंस्पेक्शन विद एसिटिक एसिड (VIA) तकनीक के माध्यम से महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा रही है। यह तकनीक कम लागत वाली और प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर आसानी से उपलब्ध कराई जा सकने वाली जांच पद्धति है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तक कैंसर की शुरुआती पहचान की सुविधा पहुंच रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत देशभर में अब तक 8.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर जांच की जा चुकी है। यह अभियान विशेष रूप से उन महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर केंद्रित है, जो नियमित जांच सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं।

HPV टीकाकरण से बढ़ेगी सुरक्षा
सर्वाइकल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने किशोरियों के लिए HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की थी।

इस अभियान का लक्ष्य 14 वर्ष की लगभग 1.2 करोड़ किशोरियों को HPV वैक्सीन उपलब्ध कराना है। सरकार द्वारा संचालित इस अभियान के तहत गार्डासिल क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन दी जा रही है। यह टीका सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है और इसके लिए एकल खुराक (सिंगल डोज) व्यवस्था अपनाई गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में HPV टीकाकरण भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही नियमित स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान बीमारी के समय पर पता लगाने में मदद करते हैं।

‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ की सोच को बढ़ावा
जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान सरकार के ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ के दृष्टिकोण को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत स्तर का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध परिवार और समाज के समग्र विकास से जुड़ा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि HPV टीकाकरण अभियान पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसमें अभिभावकों की सहमति को महत्व दिया गया है। सरकार का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाकर अधिक से अधिक परिवारों को इस अभियान से जोड़ना है।

2030 तक सर्वाइकल कैंसर खत्म करने का वैश्विक लक्ष्य
भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन रणनीति का समर्थन करते हुए वर्ष 2030 तक 90-70-90 लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है। इस लक्ष्य के तहत 90 प्रतिशत लड़कियों को HPV वैक्सीन उपलब्ध कराना, 70 प्रतिशत महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग करना और बीमारी से प्रभावित 90 प्रतिशत महिलाओं को उचित उपचार उपलब्ध कराना शामिल है।

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए देश के HPV टीकाकरण अभियान को दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त टीकाकरण अभियान बताया। उन्होंने कहा कि भारत की यह पहल वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के प्रयासों को गति देने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भारत में हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण, नियमित जांच, स्वास्थ्य जागरूकता और समय पर उपचार जैसी रणनीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से इस बीमारी के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भारत का यह अभियान महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत करने और कैंसर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।