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भारत में 60% HIV मरीजों का देर से होता है निदान, विशेषज्ञों ने शुरुआती जांच बढ़ाने पर दिया जोर
भारत में HIV/AIDS के खिलाफ चल रही मुहिम के बावजूद संक्रमण की समय पर पहचान एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि देश में लगभग 60 प्रतिशत HIV संक्रमित मरीजों का निदान बीमारी के काफी आगे बढ़ जाने के बाद होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देर से जांच होने के कारण मरीजों को समय पर एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) नहीं मिल पाती, जिससे उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और गंभीर संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है।
Vindhya Dubey02 अग. 2026, 09:02 PM IST

विशेषज्ञों के अनुसार, HIV संक्रमण की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। कई संक्रमित लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि वे HIV से प्रभावित हैं। जब तक वे स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचते हैं, तब तक वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा चुका होता है। ऐसे मरीजों में CD4 कोशिकाओं की संख्या कम हो सकती है, जिससे शरीर सामान्य संक्रमणों से भी लड़ने में कमजोर पड़ जाता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि HIV का देर से पता चलना केवल मरीज के स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे संक्रमण के आगे फैलने की संभावना भी बढ़ती है। यदि किसी व्यक्ति को अपनी HIV स्थिति की जानकारी नहीं होती, तो वह अनजाने में अन्य लोगों तक संक्रमण पहुंचा सकता है। इसके विपरीत, समय पर जांच और उपचार शुरू होने से वायरस को नियंत्रित किया जा सकता है और संक्रमण फैलने की संभावना को काफी कम किया जा सकता है।
HIV जांच में देरी के पीछे कई कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, HIV जांच में देरी के पीछे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई कारण जिम्मेदार हैं। HIV से जुड़े डर और सामाजिक भेदभाव के कारण कई लोग जांच कराने से बचते हैं। कुछ लोगों को यह चिंता रहती है कि HIV पॉजिटिव होने की स्थिति में उन्हें परिवार या समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा HIV संक्रमण के बारे में जागरूकता की कमी भी एक बड़ी वजह है। कई लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि जोखिम की स्थिति में जांच कराना जरूरी है। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी, जांच केंद्रों की दूरी और नियमित स्वास्थ्य जांच की आदत का अभाव भी देर से निदान में योगदान देता है।
शुरुआती जांच से बेहतर हो सकते हैं इलाज के परिणाम
विशेषज्ञों का कहना है कि HIV संक्रमण की जल्द पहचान मरीज के लिए जीवन बदलने वाला कदम साबित हो सकती है। समय पर ART उपचार शुरू होने से वायरस की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। ART दवाएं HIV वायरस को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं, लेकिन यह वायरस की वृद्धि को रोकने में प्रभावी होती हैं। नियमित उपचार लेने वाले मरीज लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं और HIV से संबंधित गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।
जोखिम वाले समूहों की स्क्रीनिंग बढ़ाने की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने HIV जांच को बढ़ावा देने के लिए जोखिम वाले समूहों की नियमित स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। इनमें HIV संक्रमित व्यक्ति के साथी, गर्भवती महिलाएं, इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थ लेने वाले लोग और ऐसे लोग शामिल हैं, जिनमें संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। गर्भवती महिलाओं में HIV की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उचित उपचार और चिकित्सा देखभाल के माध्यम से मां से बच्चे में संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भारत में HIV नियंत्रण कार्यक्रम
भारत सरकार राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के माध्यम से HIV संक्रमण की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत देशभर में Integrated Counselling and Testing Centres (ICTC) के माध्यम से HIV जांच और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा ART केंद्रों के नेटवर्क के जरिए HIV संक्रमित मरीजों को मुफ्त एंटीरेट्रोवायरल दवाएं, नियमित जांच और उपचार संबंधी सहायता दी जाती है। सरकार का लक्ष्य HIV संक्रमण की पहचान बढ़ाना, मरीजों को समय पर उपचार से जोड़ना और AIDS से होने वाली मौतों को कम करना है।
HIV को लेकर सोच बदलने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि HIV को लेकर समाज में मौजूद गलत धारणाओं और भेदभाव को खत्म करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि HIV अब एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जिसे नियमित उपचार और निगरानी के साथ नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता अभियान, स्कूल और समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा, आसान जांच सुविधाएं और गोपनीय चिकित्सा सेवाएं HIV नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भारत में HIV मरीजों के देर से निदान की समस्या स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। लगभग 60 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण का पता बीमारी बढ़ने के बाद चलना यह दर्शाता है कि शुरुआती जांच और जागरूकता को और मजबूत करने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग समय पर HIV जांच कराएं, संक्रमित मरीजों को तुरंत ART उपचार से जोड़ा जाए और समाज में HIV को लेकर डर व भेदभाव कम किया जाए, तो संक्रमण के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। शुरुआती पहचान न केवल मरीज की जिंदगी बचाने में मदद करती है, बल्कि भारत के HIV उन्मूलन लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
