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विश्व स्तनपान सप्ताह: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान तेज

नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देशभर में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभाग, अस्पतालों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थानों की ओर से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

Vindhya Dubey02 अग. 2026, 09:02 PM IST
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विश्व स्तनपान सप्ताह: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान तेज
इस वर्ष अभियान का मुख्य फोकस जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करने और बच्चे के शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध देने के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना है।

स्तनपान को नवजात शिशु के लिए प्रकृति का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पोषण स्रोत माना जाता है। मां के दूध में बच्चे की जरूरत के अनुसार सभी आवश्यक पोषक तत्व, प्रोटीन, वसा, विटामिन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले तत्व मौजूद होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्तनपान करने वाले बच्चों में दस्त, निमोनिया और अन्य संक्रमणों का खतरा कम हो सकता है तथा उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती घंटे में स्तनपान शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान मिलने वाला पहला दूध यानी कोलोस्ट्रम, जिसे कई बार गाढ़ा पीला दूध कहा जाता है, शिशु के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करती हैं और उसे शुरुआती संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभागों की ओर से माताओं को स्तनपान की सही तकनीक, बच्चे को सही तरीके से दूध पिलाने के तरीके और स्तनपान से जुड़ी समस्याओं के समाधान के बारे में जानकारी दी जा रही है। अस्पतालों में विशेष परामर्श शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां डॉक्टर और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी नई माताओं को स्तनपान से संबंधित मार्गदर्शन दे रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और सहायक नर्स मिडवाइफ यानी एएनएम के माध्यम से घर-घर जाकर महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। इन अभियानों में गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को संतुलित आहार, प्रसव के बाद देखभाल और नवजात शिशु के पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं।

स्तनपान केवल शिशु के स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मां के लिए भी कई तरह से लाभकारी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्तनपान कराने से प्रसव के बाद मां के शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में मदद मिलती है और यह मातृ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।

सरकार की ओर से चलाए जा रहे पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाओं और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से महिलाओं तक पोषण संबंधी सेवाएं और आवश्यक परामर्श पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

हालांकि, कई क्षेत्रों में आज भी स्तनपान को लेकर सामाजिक भ्रांतियां, गलत धारणाएं और जागरूकता की कमी एक चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार के सदस्यों, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज के सहयोग से इन चुनौतियों को दूर किया जा सकता है। पति और परिवार के अन्य सदस्यों की सकारात्मक भूमिका भी महिलाओं को सफल स्तनपान कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकती है।

विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य केवल एक सप्ताह तक जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि माताओं को लंबे समय तक सही जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराना है, ताकि हर नवजात को जीवन की शुरुआत में आवश्यक पोषण मिल सके। बेहतर स्तनपान प्रथाएं मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।