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मुरैना में चक्कर आने पर बेहोश हुई शिक्षिका को हार्ट अटैक समझ दिया गलत सीपीआर, दो पसलियां टूटीं

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कैलारस के भुरावली चौराहे पर भीषण गर्मी के कारण स्कूटी से गिरकर बेहोश हुई 41 वर्षीया शिक्षिका ललिता धाकड़ को स्थानीय लोगों ने हार्ट अटैक समझकर गलत तरीके से लगातार सीपीआर दे दिया, जिससे उनकी दो पसलियां टूट गईं

Kalpana Gautam02 अग. 2026, 10:05 PM IST
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मुरैना में चक्कर आने पर बेहोश हुई शिक्षिका को हार्ट अटैक समझ दिया गलत सीपीआर, दो पसलियां टूटीं

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कैलारस के भुरावली चौराहे पर भीषण गर्मी के कारण स्कूटी से गिरकर बेहोश हुई 41 वर्षीया शिक्षिका ललिता धाकड़ को स्थानीय लोगों ने हार्ट अटैक समझकर गलत तरीके से लगातार सीपीआर दे दिया, जिससे उनकी दो पसलियां टूट गईं 

यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे आधी-अधूरी जानकारी और बिना नाड़ी-सांस की जांच किए दिया गया CPR किसी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. आपातकालीन स्थिति में सही प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान होना बेहद जरूरी है, वरना मदद करने की नीयत भी किसी की मुसीबत बढ़ा सकती है

तिलोंजरी उच्च माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका ललिता धाकड़ जब स्कूटी से स्कूल जा रही थीं, तभी अचानक चक्कर आने से वह सड़क पर गिर पड़ीं. उन्हें बेसुध देखकर आसपास मौजूद भीड़ ने मान लिया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है. इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया. हद तो तब हो गई जब कुछ युवक उन्हें कैलारस अस्पताल ले जाते समय गाड़ी में भी लगातार सीपीआर देते रहे

कैलारस अस्पताल पहुंचने पर जब डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया तो एक अलग ही सच्चाई सामने आई. शिक्षिका को दिल का दौरा या कार्डियक अरेस्ट आया ही नहीं था, बल्कि वह अत्यधिक गर्मी और कमजोरी के कारण चक्कर खाकर बेहोश हुई थीं. होश में आने के बाद जब महिला ने छाती में असह्य दर्द की शिकायत की, तो डॉक्टरों द्वारा कराए गए एक्स-रे में खुलासा हुआ कि अत्यधिक दबाव और गलत तकनीक से दिए गए सीपीआर के कारण उनकी दो पसलियां टूट चुकी हैं 

घटना की पुष्टि करते हुए कैलारस के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. मनीष शर्मा ने बताया, महिला मरीज को कार्डियक अरेस्ट नहीं हुआ था. गलत तरीके से और बिना स्थिति जाने लगातार सीपीआर दिए जाने के कारण उनकी दो पसलियां फ्रैक्चर हो गईं. मदद की नीयत से की गई यह जल्दबाजी महिला के लिए अतिरिक्त चोट और दर्द का कारण बन गई
  
चिकित्सकों और हृदय रोग विशेषज्ञों ने इस मामले के बाद जागरूक करते हुए कहा है कि हर बेहोश होने वाले व्यक्ति को सीपीआर नहीं दिया जाता. सीपीआर केवल तभी दिया जाना चाहिए जब मरीज की सांसें रुक चुकी हों और उसकी नाड़ी (पल्स) बिल्कुल न चल रही हो. लो बीपी, डिहाइड्रेशन या उन्हाले के कारण आई सामान्य बेहोशी में सीपीआर देना गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा सकता है.