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बारामती में सरकारी नौकरी के नाम पर 117 युवाओं से 3.73 करोड़ की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देने वाले दो पर मामला दर्ज

महाराष्ट्र के पुणे जिले की बारामती तालुका पुलिस ने स्वास्थ्य, रेलवे और वन विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 117 उम्मीदवारों से 3 करोड़ 73 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में दो अंतरराज्यीय ठगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पीड़ित रंजीत हरिभाऊ मोढे की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Kalpana Gautam02 अग. 2026, 10:05 PM IST
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बारामती में सरकारी नौकरी के नाम पर 117 युवाओं से 3.73 करोड़ की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देने वाले दो पर मामला दर्ज
महाराष्ट्र के पुणे जिले की बारामती तालुका पुलिस ने स्वास्थ्य, रेलवे और वन विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 117 उम्मीदवारों से 3 करोड़ 73 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में दो अंतरराज्यीय ठगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पीड़ित रंजीत हरिभाऊ मोढे की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सरकारी नौकरी पाने की होड़ में फर्जी भर्ती रैकेट देश भर में युवाओं को निशाना बना रहे हैं। इस मामले में आरोपियों ने न केवल फर्जी चयन सूचियां और सरकारी मुहरों वाले नकली नियुक्ति पत्र बांटे, बल्कि युवाओं को झांसे में रखने के लिए फर्जी प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का नाटक भी किया। यह मामला दर्शाता है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किस तरह एक सुनियोजित सिंडिकेट उम्मीदवारों को आर्थिक और मानसिक रूप से बर्बाद कर रहा है।  

पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार शिकायतकर्ता रंजीत मोढे की पहचान वर्ष 2020 से आरोपी प्रमोद गुरव से थी। प्रमोद गुरव ने उनकी मुलाकात सुबायू सरकार उर्फ राणा से करवाई, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के वर्धमान का रहने वाला है। आरोपियों ने दावा किया कि उनकी मंत्रालयों और सरकारी विभागों में ऊंची पहुंच है और वे स्वास्थ्य, वन, जल संसाधन, समाज कल्याण, ओएनजीसी तथा भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी दिलवा सकते हैं।  

साल 2023-24 के दौरान विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं के नाम पर आरोपियों ने उत्सुक उम्मीदवारों से आवेदन मंगवाए। राज्य सरकार के विभागों में नौकरी दिलाने के लिए प्रति उम्मीदवार लगभग 5 लाख रुपये और रेलवे में नौकरी के लिए 6 लाख रुपये की मांग की गई।  फरियादी और अन्य 116 युवाओं ने नकद तथा ऑनलाइन माध्यम से किश्तों में कुल 3.73 करोड़ रुपये जमा कराए। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने फर्जी चयन सूची जारी की और सरकारी मुहर लगे जाली नियुक्ति पत्र वितरित किए। कुछ समय तक जब किसी को वास्तविक पोस्टिंग नहीं मिली और नौकरी का नाटक बेनकाब हुआ, तो पीड़ितों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।