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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई की होगी SIT जांच, पेलेट गन और लाठीचार्ज पर उठे बड़े सवाल

छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा, पुलिस लाठीचार्ज, पेलेट गन के इस्तेमाल और दर्ज FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए SIT जांच के निर्देश दिए और कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Sonali03 अग. 2026, 11:18 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई की होगी SIT जांच, पेलेट गन और लाठीचार्ज पर उठे बड़े सवाल

नई दिल्ली, 3 अगस्त 2026

देशभर में परीक्षा प्रणाली और कथित पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक बार फिर अहम सुनवाई कर रहा है। इस मामले को लेकर पूरे देश की नजर सर्वोच्च अदालत पर है, क्योंकि पिछली सुनवाई में अदालत ने संकेत दिया था कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत के समक्ष कई याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल, घायल पुलिस अधिकारियों की शिकायतें तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाएं शामिल हैं।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

जुलाई 2026 में परीक्षा प्रणाली और कथित प्रश्नपत्र लीक के विरोध में शुरू हुए छात्र आंदोलन ने कई राज्यों में उग्र रूप ले लिया। कई जगह प्रदर्शन हिंसक हो गए और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। छात्रों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग, लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगाए, जबकि सरकार का कहना है कि हिंसा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से विभिन्न याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

28 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक स्वतंत्र SIT का गठन किया जा सकता है ताकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों—दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके। अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि घटनास्थलों की CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, PCR कॉल, वायरलेस संचार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं ताकि कोई भी महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट न हो। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उनके खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। हिरासत में लिए गए नाबालिगों और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को रिहा करने का भी निर्देश दिया गया। हालांकि राज्यों को दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है।

आज की सुनवाई में क्या हो सकता है?

आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र SIT के गठन, पुलिस बल प्रयोग की जांच, पेलेट गन के इस्तेमाल, छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर, घायल पुलिसकर्मियों से जुड़ी याचिकाओं तथा केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दाखिल जवाबों पर विचार कर सकता है।

इसके अलावा अदालत भविष्य में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की संभावना पर भी विचार कर सकती है, ताकि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

अब तक अदालत की प्रमुख टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट किया था कि केवल विरोध प्रदर्शन होने भर से बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, वहीं यदि किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई है या पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से अदालत पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और सभी पक्षों को समान अवसर देने पर जोर दे रही है।


यदि आज SIT के गठन पर औपचारिक आदेश जारी होता है, तो यह पूरे मामले की जांच की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। वहीं छात्रों, पुलिस प्रशासन और सरकार—तीनों की ओर से दायर याचिकाओं पर आने वाला अदालत का फैसला भविष्य में विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।