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दिल्ली कोर्ट से बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत: महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बरी, सह-आरोपी विनोद तोमर भी दोषमुक्त
बृजभूषण शरण सिंह को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब तीन साल तक चले कानूनी विवाद के बाद अदालत ने सबूतों के अभाव में पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया, जिससे देशभर में एक बार फिर इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।

नई दिल्ली: देशभर में चर्चा का विषय बने महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार (3 अगस्त 2026) को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने इस मामले के सह-आरोपी और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी दोषमुक्त घोषित किया। यह फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने सुनाया।
यह मामला वर्ष 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर 2016 से 2019 के बीच विभिन्न प्रतियोगिताओं और आयोजनों के दौरान यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा भंग करने, पीछा करने (स्टॉकिंग) और आपराधिक धमकी जैसे आरोप लगाए थे। शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के उपरांत दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जून 2023 में विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।
मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में इन-कैमरा (बंद अदालत) में हुई। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 32 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें शिकायतकर्ता महिला पहलवान भी शामिल थीं। अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 3 अगस्त 2026 को सुनाया गया।
अदालत ने अपने निर्णय में दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुरूप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। यह मामला केवल अदालत तक सीमित नहीं रहा था। 2023 में ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई महिला पहलवानों ने जंतर-मंतर पर लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन किया था। खिलाड़ियों ने खेल महासंघ में जवाबदेही, महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। इस आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति, खेल प्रशासन और महिला सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी।
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास की जीत बताया, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष के पास कानून के तहत उच्च अदालत में अपील का विकल्प खुला रहेगा। फिलहाल इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला ट्रायल कोर्ट स्तर पर प्रक्रिया का समापन माना जा रहा है।
