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सीएम जोसेफ विजय पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले DMK विधायक मार्कंडायन को हाईकोर्ट से राहत, सख्त शर्तों के साथ मिली जमानत

देश की राजनीति में बयानबाज़ी को लेकर एक बार फिर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार DMK विधायक जी.वी. मार्कंडायन को मद्रास हाईकोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायक भविष्य में मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसी टिप्पणी नहीं करेंगे और जांच में पूरा सहयोग देंगे।

Sonali03 अग. 2026, 05:27 PM IST
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सीएम जोसेफ विजय पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले DMK विधायक मार्कंडायन को हाईकोर्ट से राहत, सख्त शर्तों के साथ मिली जमानत

 चेन्नई, 3 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के खिलाफ कथित रूप से धमकी भरे और आपत्तिजनक बयान देने के आरोप में गिरफ्तार DMK के विलाथिकुलम विधायक जी.वी. मार्कंडायन को सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली। अदालत ने सख्त शर्तों के साथ उन्हें जमानत दे दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधायक को भविष्य में मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी नहीं करने का शपथपत्र (अंडरटेकिंग) देना होगा। मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरैयन ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मार्कंडायन को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह तक प्रतिदिन सुबह और शाम जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होंगे। हालांकि, जिन दिनों तमिलनाडु विधानसभा का सत्र चलेगा, उन दिनों उन्हें इस शर्त से छूट रहेगी।


क्या है पूरा मामला?

अभियोजन के अनुसार, 18 जुलाई 2026 को मार्कंडायन ने अपनी पार्टी की ओर से मतदाताओं का आभार व्यक्त करने के लिए आयोजित एक सार्वजनिक सभा में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक, अभद्र और धमकी भरी टिप्पणियां की थीं। आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री को विधानसभा के भीतर "सबक सिखाने" और कुछ परिस्थितियों में उन्हें नुकसान पहुंचाने जैसी बातें कही थीं। इन आरोपों के आधार पर 19 जुलाई 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3), 352 और 353(2) के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अगले दिन 20 जुलाई 2026 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और मजिस्ट्रेट ने उन्हें 3 अगस्त 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।


गिरफ्तारी को भी दी थी चुनौती

मार्कंडायन ने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, उनमें अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) (पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41A) के अनुसार पहले नोटिस देकर जांच में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए था, बिना नोटिस सीधे गिरफ्तारी उचित नहीं थी।

हालांकि, तूतीकोरिन (Thoothukudi) की निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


राज्य सरकार ने नहीं किया जमानत का विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से लोक अभियोजक जॉन सत्यन ने अदालत को बताया कि विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला है, इसलिए जमानत दिए जाने पर सरकार को कोई विशेष आपत्ति नहीं है। हालांकि उन्होंने आग्रह किया कि विधायक को भविष्य में मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करने से रोका जाए।

राज्य की इस दलील और मामले के रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने मार्कंडायन को शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश पारित किया।


मामले का विवरण

मामला: G.V. Markandayan v. State
केस नंबर: CRL OP (MD) No. 16216/2026
अदालत: मद्रास हाईकोर्ट
न्यायाधीश: न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरैयन
आदेश की तारीख: 3 अगस्त 2026