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2025 में भारत में हुए 20,138 अंग प्रत्यारोपण, केंद्र ने शुरू किया ‘जुग जुग जियो अभियान’
किसी की मृत्यु के बाद भी उसका जीवन किसी दूसरे व्यक्ति में धड़कता रहे, यही अंगदान की सबसे बड़ी मानवीय भावना है। देश में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने और प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 16वें भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं।

राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की ओर से नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने अंगदान को “मानवता और करुणा की सर्वोच्च अभिव्यक्ति” बताया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का अंगदान कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे सकता है और यह केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के प्रति सबसे बड़ा योगदान है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, डॉक्टर, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, अंगदाता परिवार और अंग प्रत्यारोपण से लाभ पाने वाले मरीज शामिल हुए।
भारत में अंग प्रत्यारोपण ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत में अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2025 में देश में कुल 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जो एक वर्ष में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। साल 2013 में जहां देश में केवल 4,990 अंग प्रत्यारोपण हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या चार गुना से अधिक बढ़कर 20 हजार के पार पहुंच गई। वर्ष 2024 में 18,911 प्रत्यारोपण किए गए थे, जिसकी तुलना में 2025 में लगभग 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। भारत अब कुल अंग प्रत्यारोपण की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। अमेरिका और चीन के बाद भारत सबसे अधिक अंग प्रत्यारोपण करने वाले देशों में शामिल है। वहीं जीवित दाताओं (Living Donors) से होने वाले अंग प्रत्यारोपण में भारत दुनिया में पहले स्थान पर बना हुआ है।
मृतक अंगदान में चार गुना से अधिक वृद्धि
भारत में मृतक दाताओं (Deceased Donors) से अंग प्राप्त करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। आंकड़ों के अनुसार:
2013 में मृतक दाता अंग प्रत्यारोपण की संख्या 837 थी।
2025 में यह बढ़कर 3,526 हो गई।
यानी पिछले एक दशक में मृतक अंगदान के माध्यम से होने वाले प्रत्यारोपण में चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि देश में अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है। हजारों मरीज हर साल किडनी, लिवर, हृदय और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं।
5 लाख से ज्यादा लोगों ने लिया अंगदान का संकल्प
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंगदान को लेकर की गई अपील के बाद लोगों में जागरूकता बढ़ी है। 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान प्रतिज्ञा पोर्टल के माध्यम से अब तक 5 लाख से अधिक लोगों ने आधार सत्यापित अंगदान का संकल्प लिया है। इसके अलावा वर्ष 2025 में ही 2.58 लाख से अधिक नागरिकों ने अंग और ऊतक दान करने की प्रतिज्ञा की। सरकार का उद्देश्य है कि अंगदान को लेकर समाज में मौजूद डर और भ्रम को दूर किया जाए और अधिक से अधिक लोग इस जीवन बचाने वाले अभियान से जुड़ें।
अंगदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने की जरूरत
स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने कहा कि अंगदान को लेकर कई सामाजिक और धार्मिक भ्रांतियां अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया के किसी भी बड़े धर्म में अंगदान का विरोध नहीं किया गया है। सभी धर्म मानव सेवा, दया और जीवन बचाने की भावना को महत्व देते हैं।उन्होंने कहा कि अंगदान केवल एक चिकित्सा निर्णय नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानवता का प्रतीक है।
‘जुग जुग जियो अभियान’ से गांव-गांव तक पहुंचेगा संदेश
भारतीय अंगदान दिवस पर केंद्र सरकार ने ‘जुग जुग जियो अभियान’ की शुरुआत की है। यह एक वर्ष तक चलने वाला राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान होगा, जिसका उद्देश्य देश के हर वर्ग तक अंगदान का संदेश पहुंचाना है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी उसके अंग किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन को आगे बढ़ा सकते हैं। सरकार इस अभियान को गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, स्वास्थ्य संस्थानों और सामुदायिक स्तर तक पहुंचाने की योजना बना रही है।
लॉन्च हुआ ‘e-प्रत्यारोपण’ डिजिटल प्लेटफॉर्म
अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ‘e-प्रत्यारोपण’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह एकीकृत डिजिटल सिस्टम अस्पतालों, डॉक्टरों, दाताओं, मरीजों और प्रशासनिक संस्थाओं को एक मंच पर जोड़ेगा। इसके जरिए—
अंगदान पंजीकरण,
मरीजों की प्रतीक्षा सूची (Waiting List),
अंग आवंटन प्रक्रिया,
निगरानी व्यवस्था,
जानकारी साझा करने की प्रक्रिया
को आसान और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके अलावा नागरिकों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए NOTTO मोबाइल ऐप भी शुरू किया गया है।
ब्रेन स्टेम डेथ और स्वैप ट्रांसप्लांट के लिए नए दिशा-निर्देश
कार्यक्रम में राष्ट्रीय ब्रेन स्टेम डेथ प्रमाणन दिशा-निर्देश और स्वैप ट्रांसप्लांटेशन के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश भी जारी किए गए। ब्रेन स्टेम डेथ की सही पहचान और प्रमाणन अंगदान प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नए दिशा-निर्देशों से अस्पतालों में प्रक्रिया को अधिक मानकीकृत और वैज्ञानिक बनाया जा सकेगा। स्वैप ट्रांसप्लांटेशन उन मामलों में मदद करता है जहां कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य को सीधे अंग दान नहीं कर सकता, लेकिन दूसरे दाता-प्राप्तकर्ता समूह के साथ अदला-बदली के माध्यम से प्रत्यारोपण संभव हो सकता है।
देश में बढ़ रहा है अंग प्रत्यारोपण नेटवर्क
सरकार ने बताया कि देश में अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। इसमें शामिल हैं:
NOTTO यानी राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन
5 ROTTO यानी क्षेत्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन
26 SOTTO यानी राज्य स्तरीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन
लगभग 1,200 पंजीकृत अस्पताल
यह नेटवर्क अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल, अंगों की उपलब्धता और जरूरतमंद मरीजों तक समय पर अंग पहुंचाने में मदद कर रहा है।
आयुष्मान भारत से मिलेगा प्रत्यारोपण मरीजों को लाभ
सरकार ने अंग प्रत्यारोपण मरीजों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत किडनी प्रत्यारोपण को स्वास्थ्य लाभ पैकेज में शामिल किया गया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राष्ट्रीय आरोग्य निधि के माध्यम से सहायता दी जाती है। प्रत्यारोपण के बाद लंबे समय तक चलने वाली दवाओं की जरूरत को देखते हुए देशभर में 20 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
AIIMS सहित कई संस्थानों में बढ़ी सुविधा
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि देश में ट्रांसप्लांट सुविधाओं का विस्तार हुआ है। AIIMS नई दिल्ली के अलावा अब कई नए AIIMS में भी प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इनमें:
AIIMS जोधपुर
AIIMS भुवनेश्वर
AIIMS पटना
AIIMS ऋषिकेश
में लिवर प्रत्यारोपण सेवाएं शुरू की गई हैं। AIIMS भोपाल में हार्ट ट्रांसप्लांट सुविधा भी शुरू की गई है।
विशेषज्ञों का मानना: रोकथाम भी जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल प्रत्यारोपण सुविधाओं को बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। देश को उन बीमारियों की रोकथाम पर भी ध्यान देना होगा, जिनके कारण अंततः अंग खराब होने की स्थिति आती है। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, योग, फिटनेस और नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और नशे जैसी समस्याओं पर नियंत्रण करके कई गंभीर बीमारियों और अंग विफलता के मामलों को कम किया जा सकता है।
भारतीय अंगदान दिवस का महत्व
भारतीय अंगदान दिवस हर वर्ष 3 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन 3 अगस्त 1994 को दिल्ली स्थित AIIMS में हुए भारत के पहले सफल मृतक दाता हृदय प्रत्यारोपण की याद में मनाया जाता है। यह दिवस उन अंगदाताओं और उनके परिवारों को सम्मान देने का अवसर है, जिनके फैसले ने हजारों लोगों को नया जीवन दिया है। सरकार का लक्ष्य अब अंगदान को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि देशव्यापी सामाजिक आंदोलन बनाना है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों को समय पर जीवनदान मिल सके।
