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PM SHRI योजना में बड़ी उपलब्धि, देशभर में 13,092 स्कूल बने मॉडल स्कूल
प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI) योजना के तहत अब तक देशभर में 13,092 सरकारी स्कूलों का चयन किया जा चुका है। योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप सरकारी स्कूलों को आधुनिक, डिजिटल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण केंद्रों में बदलना है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाएं, शिक्षक प्रशिक्षण, समावेशी शिक्षा और 21वीं सदी के कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 14,500 से अधिक स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है, ताकि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल सके।
Anshuman Mishra03 अग. 2026, 05:40 PM IST

प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI) योजना देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने की दिशा में केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी पहलों में से एक बनकर उभरी है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक देशभर में 13,092 स्कूलों का चयन PM SHRI स्कूलों के रूप में किया जा चुका है। इन स्कूलों का उद्देश्य केवल बुनियादी सुविधाओं का विकास करना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सभी प्रमुख सिद्धांतों को जमीन पर लागू करते हुए इन्हें देश के आदर्श विद्यालयों के रूप में विकसित करना है।
PM SHRI यानी "प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया" एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2022-23 में की गई थी। इस योजना की अवधि 2026-27 तक निर्धारित की गई है। सरकार का लक्ष्य देशभर के 14,500 से अधिक सरकारी स्कूलों को आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थानों में बदलना है। चयनित स्कूलों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता, आधुनिक बुनियादी ढांचा, डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान एवं गणित प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और शिक्षक प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि PM SHRI स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सभी सुधारों का प्रदर्शन करेंगे और आसपास के अन्य विद्यालयों के लिए मॉडल स्कूल की भूमिका निभाएंगे। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की बहुभाषी आवश्यकताओं, विविध सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि और अलग-अलग सीखने की क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा वातावरण तैयार किया जाएगा, जिसमें हर छात्र सक्रिय रूप से सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बने।
PM SHRI योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका उद्देश्य केवल परीक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप इसमें बच्चों के संपूर्ण विकास पर जोर दिया गया है। यानी विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता, डिजिटल साक्षरता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, नवाचार, संचार कौशल और 21वीं सदी के अन्य आवश्यक कौशल विकसित किए जाएंगे। इसके तहत शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, अनुभव आधारित और गतिविधि आधारित बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
योजना के अंतर्गत स्कूलों का चयन सीधे नहीं किया जाता। इसके लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच पहले एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाते हैं। इसके बाद "चैलेंज मोड" के माध्यम से विद्यालयों का चयन किया जाता है, जिसमें विभिन्न मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले सरकारी स्कूलों को PM SHRI का दर्जा दिया जाता है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और राज्यों को अपने सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रेरणा मिलती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि PM SHRI स्कूलों में वही पाठ्यक्रम लागू रहेगा, जिससे स्कूल संबद्ध हैं। CBSE से जुड़े स्कूल CBSE का पाठ्यक्रम पढ़ाएंगे, जबकि राज्य बोर्ड से संबद्ध विद्यालय अपने-अपने राज्य बोर्ड का पाठ्यक्रम जारी रखेंगे। हालांकि सभी स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विकसित नए पाठ्यचर्या ढांचे 5+3+3+4 के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी। राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं और भाषाई परिस्थितियों के अनुसार पाठ्यक्रम को अनुकूलित करने की भी छूट दी गई है, बशर्ते राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल सिद्धांतों और संवैधानिक मूल्यों का पालन किया जाए।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार PM SHRI स्कूलों में सुरक्षित, समावेशी और आनंददायक शिक्षण वातावरण तैयार किया जाएगा, जहां हर बच्चे को समान अवसर मिले। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इससे सरकारी स्कूलों की छवि मजबूत होने के साथ निजी स्कूलों पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
योजना के लिए वित्तीय सहायता का आवंटन और वितरण वित्त वर्ष 2023-24 से शुरू किया गया था। संसद में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 2023-24, 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के दौरान राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS) और NCERT को चरणबद्ध तरीके से धनराशि जारी की गई है। इस वित्तीय सहायता का उपयोग स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास, स्मार्ट कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर किया जा रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि PM SHRI योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह भारत की सरकारी शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार होगा, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, छात्रों की सीखने की क्षमता बेहतर होगी और शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल भवन, स्मार्ट क्लास या तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्यों द्वारा समय पर धनराशि का उपयोग, शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण, सीखने के परिणामों की निगरानी और स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित किया जाता है या नहीं। यदि इन पहलुओं पर समान रूप से ध्यान दिया गया, तो PM SHRI योजना आने वाले वर्षों में भारत की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाली सबसे महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।
