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बैंक ऑफ बड़ौदा से कस्टमर डेटा लीक अकाउंट डिटेल्स, आधार और मोबाइल नंबर समेत संवेदनशील जानकारी लीक होने का दावा l

बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़े एक बड़े साइबर डेटा ब्रीच ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक बैंक से जुड़े करीब 1TB डेटा के डार्क वेब पर सामने आने का दावा किया गया है। कथित डेटा में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी, आधार संबंधी दस्तावेज, बैंक अकाउंट से जुड़े रिकॉर्ड, लोन दस्तावेज और अन्य बैंकिंग जानकारियां शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि घटना एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट के साथ हुए समझौते से जुड़ी है और उसके कोर बैंकिंग सिस्टम प्रभावित नहीं हुए हैं। बैंक ने फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई है।

Kashish Rai03 अग. 2026, 05:47 PM IST
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बैंक ऑफ बड़ौदा से कस्टमर डेटा लीक अकाउंट डिटेल्स, आधार और मोबाइल नंबर समेत संवेदनशील जानकारी लीक होने का दावा l

 बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़े एक बड़े डेटा ब्रीच ने बैंक के लाखों ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार बैंक से करीब 1TB डेटा लीक होने का दावा किया गया है। कथित तौर पर यह डेटा इंटरनेट और डार्क वेब पर सामने आया है। इसमें ग्राहकों की निजी और बैंकिंग जानकारी से जुड़े कई संवेदनशील रिकॉर्ड शामिल होने की बात कही जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक कथित लीक में ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक अकाउंट की डिटेल्स, लोन से संबंधित दस्तावेज और नेट बैंकिंग रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कॉरपोरेट बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज और कुछ आंतरिक बैंक रिकॉर्ड भी लीक होने का दावा किया गया है। हालांकि, लीक हुए डेटा की पूरी मात्रा और उसमें शामिल सभी जानकारियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।


मामला सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा से जुड़े लोगों ने भी चिंता जताई है। कथित तौर पर एक थ्रेट एक्टर की ओर से डेटा लीक करने का दावा किया गया और कुछ डेटा सैंपल तथा स्क्रीनशॉट साझा किए गए। सोशल मीडिया पर इस दावे के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों के बीच भी चिंता बढ़ गई। बैंक ऑफ बड़ौदा ने डेटा ब्रीच की पुष्टि की है। बैंक के अनुसार, एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट से अनधिकृत तरीके से डेटा तक पहुंच बनाई गई थी। हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस घटना से उसका कोर बैंकिंग सिस्टम प्रभावित नहीं हुआ है। बैंक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस तरह का डेटा एक्सेस हुआ और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस डेटा ब्रीच से ग्राहकों के बैंक खातों में जमा पैसा सीधे खतरे में है। फिलहाल ऐसा जरूरी नहीं है। केवल व्यक्तिगत जानकारी लीक होने से बैंक खाते से सीधे पैसे नहीं निकाले जा सकते। हालांकि, साइबर अपराधियों के लिए ऐसी जानकारी काफी उपयोगी साबित हो सकती है। वे बैंक अधिकारी बनकर ग्राहकों को फोन कर सकते हैं और केवाईसी अपडेट, अकाउंट ब्लॉक या संदिग्ध ट्रांजैक्शन के नाम पर ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। डेटा लीक की स्थिति में फिशिंग और पहचान की चोरी का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में बैंक ग्राहकों को अनजान कॉल, मैसेज और ईमेल से सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, नेट बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। केवाईसी अपडेट के नाम पर भेजे गए किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचना चाहिए।


ग्राहकों को अपने बैंक अकाउंट की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। अगर कोई अनजान या संदिग्ध लेनदेन दिखाई देता है तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर शिकायत की जा सकती है। फिलहाल बैंक की जांच जारी है। फॉरेंसिक जांच और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कथित तौर पर कितना डेटा लीक हुआ, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और डेटा ब्रीच के पीछे कौन जिम्मेदार है। तब तक बैंक ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखें।